पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 283, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें२८२ पद्मावत। हौं ब्राह्मण जेहिकुमुदिनिनाऊँ। हम तुमउपँजी एकहि ठाँऊँ॥ नाऊँ पितौ कर दूवे वेनी। सोइ पुरोहित गन्धर्पसेनी॥ तुम वारी तब सिंहल दीपा। लीन्हेँ दूध पियायों सीपा॥ दो० ठाँउँ कीन्ह मैं दूसर, कम्भलनी रहि आय। सुनितुमकहूँ चित्तौर महँ, कहूँ कि भेटों जाय॥ सुनि निरुचै नैहरकी गोई। गरे लाग पद्मावत रोई॥ नयनगगनँ रवि बिन अँधियारो। शशिसुखआंशु टूटजनु तारे॥ जग अँधियार गहनदिनपरा। कवलगशैशिनखतहितसमरा॥ माय बाप कित जन्मी वारी। ग्रीवं तोड़ कित जन्म नमारी॥ कित विवाह दुखदीन्ह दुहेलाँ। चितौर पंथ कन्त बंद मेला॥ अबयहिजियनचाहस लमरना। अठो पहार जन्म दुख भरना॥ निकसनजाय निलजयहजीउ। देखों मंदिर सून बँद पीउ॥ दो० कुहुकजोरोवे शशिनखतँ, नयनहिंरौंतचकोर। अबहूँ बोले तहँ कुहुक, चातृकँ कोकिल मोर॥ कुमुदिन कण्ठलाग सुठ रोई। पुनि लै रोग डारे मुख धोई॥ तुइँशशिरूपजगतउजियारी। मुखनझांपनिशिँ होयअँधियारी सुनचकोर कोकिल दुखदुखी। घुँघची भई नयन करमुखी॥ केतो धाय मरै कोई बाटा। सोइपावै जो लिखा लिलाटाँ॥ जोविधि लिखाआन नहिंहोई। कित धावै कित रोवै कोई॥ कितको इच्छाँ कर औ पूजा। जो विधिलिखाहोयनहिं दूजा॥ पैदाहोना १ जगह २ बाप ३ पद्मावत का बाप ४ दूसरा खाविन्द ५ यक़ीन ६ गुइयां ७ आसमान ८ सूर्य ९ चांद १०-११-२३ गर्दन १२ भारी १३ राह १४ खाविन्द १५ क़ैद १६ चांद तथा पद्मावत १७ तथा सखी १८ लाल १९ पपीहा २० नामदूती २१ आफ़ताब २२ रात २४ माथा २५ ईश्वर २६ चाहना २७॥