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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 284

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पद्मावत । २८३ जेते कुमुदिनि बयन करेई। तस पद्मावत उत्तर न देई॥ दो० सेंदुर चीर मैलतस, सूख रही तस भूल। जेहि शृंगार पियतेंजिगया, जन्म न पहिरे फूल॥ तब पकवान उघारा दूती। पद्मावत नहिं छुई अछूती॥ मोहिं अपने पियकेर खँभारू। पान फूल कस होय अहारू॥ मोकहँ फूल भये जस कांटी। बांटि देहु जो चाहेसि बांटी॥ रतनछुवे जेहि हाथहिं सेती। औ न छुवों सो हाथ सकेती॥ दमक रङ्गभय हाथ मँजीठी। मुक्तौं लेउँ पै घुँघची दीठी॥ नयन करसुखी राती काया। मोती होहिं घुँघची जेहि छाया॥ असके ओछ नयन हत्यारे। देखतगा पिउ गँहे न पारे॥ दो० कातोर छुवों पकवान मैं, गुड़ कडुवा घिउ रूख। जेहिमिलाहोतसवाद रस, लै पिय गयो सुभूख॥ कुमुदिन रही कमलके पासा। बैरी सूर्य चाँदकी आसा॥ वह कुँमलान रही भै चूरू। बिकसै रैनि वातहिंकरभोरू॥ कसतुइँौरिरिहेसि कुँभलानी। सूख बेल जस पाव न पानी॥ अबहीं कमल कली तुम बारी। कोमल बैस उठत पौनोंरी॥ बेनी तोर मैल शिर रूखी। सरवर मांह रहेसि कस सूखी॥ पान बेल विधि क्यौजंमाई। सींचत रही तोह पलहाँई॥ कर शृंगार मुख फूल तँबोला। बैठ सिंहासन झूल हिंडोला॥ दो० हार चीर नित पहिरो, शिरकी करो सँभार। भोगआनदिनदशलिये, यौवन गये न बौरे॥

..नामछूती १-१०. वात २ जवाब ३ छोड़ना ४ दुख ५ लाख ६ मोती ७ लालवदन ८ पकड़ न सके ६ तथा राजा ११ सुरखई हुई १२ खिलना १३ रात १४ लड़की १५ मुलायसउमर १६ छाती उठती हुई १७ चोटी १८ तालाब १६ ईश्वर २० वदन २१ शरीर २२ वस्त्र २३॥