पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८४ पद्मावत । बिहँसजोकुमुदिनियौवनकहा । कमल न बिकसा सम्पुटरहा ॥ ऐ कुमुदिनि यौवन तेहिमाहां । जोआछे पियंका सुखछाहां ॥ जाकर छत्र सो बाहेर छावा । सो उजार घर कौन बसावा ॥ अहा जो राजा रतन अँजूरोँ । केहकसिंहासनकेहक पटोरोँ ॥ को पलंग को पौढ़ै माँढ़े । सोवनहार परा बँद गाढ़े ॥ चहुँदिशि यह घर भा अँधियारा । सब शृंगारलै साथ सिधारा ॥ कार्यां बेल जान तब जामी । सींचनहार आव घरस्वामी ॥ दो० तौलहि रहों झुरानी, जौलहि आवसो कन्तँ । यही फूल यह सेंदुर, होय सो उठै वसन्त ॥ जन तुइँ बाँरिकरेसि असजीउ । जौलहि यौवन तौलहिपीउ ॥ पुरुषं संग आपन कहु केरा । एक कुहाय दुसर सों हेरोँ ॥ यौवन जल दिनदिनजसघटा । भँवर छिपान हंस परगटोँ ॥ शुभ्रै सरोवर जौलहि नीरों । बहु आदर पंखी बहु तीरों ॥ नीरेँ घटे पुनि पूछ न कोई । परसैँजोलीजहाथरहि सोई ॥ जबलगकालिंदेँ होय बिरौसी । पुनिसुरसरिहोयसमुद्रपरासी ॥ यौवन भँवर फूल तन तोरा । वर्ध पूँछ जस हाथ मरोरा ॥ दो० यौवनैं कृष्णतन करेंनेँ, मयाँ गोतनहिं साथ । छलकै जाय हिवानपैँ २४, धनुषैं छांड़इहाथ ॥ जो पिय रतनसेन मोर राजा । विनपिय यौवन कौनेकाजा ॥ जो नहिंजिव तो यौवन कहे । विन जिव यौवन काहसोअहे ॥ खिलना १ रोशनी २ कपड़ा ३ मोढ़ा ४ बदन ५ खाविन्द ६-७ लड़की= जवानी ८ मर्द १० देखना ११ ज़ाहिर १२ भराहुआ तालाब १३ पानी १४- १६ किनारा १५ मुख १७-१८ यमुना तथा जवानी १८ गंगा तथा बुढ़ापा २० जवानी २१ नाम राजा दानी २२ मुहब्बत २३ तीर २४ कमान २५ ॥