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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। २६१ दण्डकै माया कर मोरे। योगिनहोउँ चलों सँग तोरे॥ दो० सखिन कहापद्मावतहि, प्रगटै करोना भेश। योगी जुगवे गुसै मन, लै गुरुकर उपदेश॥ भीख लेहु योगिन फिर मांगू। कन्त न पाई कीन्हें सुवांगू॥ यह बड़योग वियोग जो सहा। जैसे पिय राखै तुम रहा॥ घरही महँ रहु भई उदासा। अंचलखप्पर श्रृंगी श्वासा॥ रहै प्रेम मन उरझा लटा। विरह ढँढार परहिं शिरजटा॥ नयन चक्र लावै लै पन्था। कायौं कापर सोई कन्थौ॥ छालाभूमि१२ गगनैशिरछाता। रंगरकै रहि हिरदै१५ राता॥ मनमाला पहिरे तंत ओहीं। पाँचौ१७ भूत भस्म तन होहीं॥ दो० श्रवणँकुँडलमुनिपियवचनै, पाँवरैं पांयपरेह। दण्डकै गोरा बादलहि, जाय अधौरी लेह॥ सखिन बुझाई दग्धै अपारा। गइ गोरा बादलें केवाराँ॥ चरण कमल भुइँजन्मन धरी। जात तहां लग छाला परी॥ निकस आय सुन क्षत्री दोऊ। तस काँपै जस काँप न कोऊ॥ केश छोर चरणन रज झारी। कहां पाँउ पद्मावत धारी॥ राखा आन पाँटै सुन वानी। विरह वियोगन बैठी रानी॥ चँवर ढार द्वै चँवर डुलावहिं। माथे छत रजायसु पावहिं॥ उलट वहा गंगाकर पानी। सेवक बारि न आवहिं रानी॥ दो० का असकट कीन्ह जिय, जो तुमकरतन छाज। १ एकघड़ी १-२१ मेहरबानी २ ज़ाहिर ३ भेद ४ छिपा ५ ओछों के फ़रेब से ६ नामराजा ७ भारी ८ राह ६ बदन १० गुदड़ी ११ ज़मीन १२ आस- मान १३ खून १४ दिल १५ लाल १६ आंख कान नाक ज़बान छूना १७ कान १८ बात १६ खड़ाऊं २० नाममंत्री २२-३५ सहारा २३ आँग २४ दरवाज़ा २६-२६ सोने का तख़्त २७ हुक्म २८॥