पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 291, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें.२६० पद्मावत । रामकुण्डे गोमंति गुरुद्वारू । दाहिनवर्त कीन्ह कै भारू ॥ सेतुबंध कैलासै सुमेरू । गयौंअलखपुर जहां गँभीरू ॥ ब्रह्मवर्त ब्रह्मावर्त परसी । बेनी संगमे सीसों करसीं ॥ नीलकंठे मिश्रिर्षे कुरुजेटों । गोरखनाथे अस्थाने समेटा ॥ दो० पटना पूर्व सो घर घर, हाड़ फिर्यो संसार । हेरंत कहूँ न पियमिला, नाकोइमिलवनहार॥ वन बन सब हेर्यो नवखण्डा । जलजलनदी अठारहगण्डा ॥ चौसठ तीर्थ कीन्ह सब ठाऊँ । लेत फिर्यो वह पियकरनाऊँ ॥ देहली सब देख्यों तुरकानू । औसुलतान केर बँदेवानू ॥ रतनसेन देख्यों बँद माहां । जरै धूप खनें पावन छाहां ॥ सब राजा बांधे औ दागी । योगिनजान राजपंगलागी ॥ कासोंभोगैं जहँअन्त न गयऊ । यहदुखलैसोगयोसुकंदयऊ ॥ देहलीनाउँ न जानों ढीली । सठबँदै गाढ़निकसनहिंगेली ॥ दो० देख दगधै दुखताकर, अझो क्यों नहिं जीउ । सो धनै कैसेंवहजिये, जाकर अस बँदपीउ ॥ पद्मावत जो सुना बँद पीउ । पराअगिनिमहँ जानहुघीउ ॥ दौरे पांय योगिन के परी । उठी आग योगिनपुनिजरी ॥ पांय देहु दुइ नयन न लाऊं । लैचल तहां कन्तजेहिठाऊं ॥ जेहि नयनन तुइँ देखा पीउ । मोहिं देखाय देव बल जीउ ॥ सत औ धर्म देउँ सब तोहीं । पियकी बात कहै जो मोहीं ॥ तुइँ मोर गुरु तोर हौं चेली । भूली फिरत पन्थे जे मेली ॥ नामतीर्थ १ से १४ तक । नामयोगी १५ मकान १६ ढूँढ़ना १७ क़ैद- ख़ाना १८ कभूं छाया नहीं पाता १९ पालागन राजाने किया २० लेकिन क्या अस्तियार जहां दखल गैरका न हो २१ भारी क़ैदखाना जहां से नि- कलना मुश्किल है २२ जलना २३ बदन २४ औरत तथा पद्मावत २५ राह २६॥