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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । २६६ जहां फूल तहँ फूल है, जहां कांटे तहँ कांटे ॥ सोरह सै चयडोल सवारी । कुँवर सजायेले तहँ बैठारी ॥ पद्मावत कर साज बेवानू । बैठ लुहार न जानै आनू ॥ रच बेवान सौ साज सँवारा । चहुँदिशिँ चमरकरहिंसबदाराँ ॥ साज सबै चयडोल चलाई । सुरँग उहार मोति बहु लाई ॥ भय सँग गोरो बादल बली । कहत चले पद्मावत चली ॥ हीरा रतन पदार्थ झूलहिं । देख बिमानँ देवता भूलहिं ॥ सोरह सै सँग चलीं सहेली । कमल न रहा और को बेली ॥ दो० राज छुड़ावन रानिचलि, आपहोय तहँ ओल । तीससहर्स तुरि खींचसँग, सोरहसै चयडोल ॥ राजा बँद जेहिके सौंपना । गागोराँ तापहँ अगमनाँ ॥ टका लाख दशदीन्ह अकोरों । बिनती कीन्हपांयगहिगोराँ ॥ बिनवौं बादशाह सो जाई । अब रानी पद्मावत आई ॥ बिनँती करै आयहूँ देहिली । चित्तौरकी मोसों है कीली ॥ बिनँती करै जहां है पूँजी । सब भँडारूँ की मोसों कूँजी ॥ एक घड़ी जो अज्ञा पाऊँ । राजा सौंप मंदिर महँ आऊँ ॥ तब रखवारँ गये सुलतानी । देख अकोरेँ भये जसपानी ॥ दो० लीन्ह अँकोर हाथ जो, जीउ दीन्ह तेहि हाथ । जो वह कहै करैसो, कहीं छांड़ नहिं माथ ॥ लोभ पाप की नदी अकोराँ । संतै न रहै हाथ जो बोरा ॥ जहँ अकोर तहँ नेकैं न राजू । ठाकुरकेर बिनाशहिं काजू ॥ बहादुर १ सूर्य २ चारोंतरफ ३ औरत ४ राजमंत्री ५-१० जवाहिरोत ६ चयडोल ७ तीसहज़ार ८ घोड़ा ६ पहिले ११ रिशवंत-नज़राना १२-२१- २२-२३ अर्ज़ १३-१४-१५-१७ कुंजी १६ खज़ाना १८ हुक्म १६ दारोगा २० ईमान २४ राजअच्छा नहीं २५ ख़राब २६ ॥