पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६८ पद्मावत । दो० कोप श्रृंगार विरह दल, टूटहोय दुइ आध । पहिले मोहिं संग्रामकै, करहुजूझकी साधै॥ कैसहूँ कंत फिरै ना फेरी । आग परी चितौर धन केरी ॥ उठी सो घूमें नयन गरवानी । लागे परे आंशु भंहरानी ॥ भीजेहार चीरें हियें चोली । रही अलूत कंत नहिं खोली॥ भीजेलाग चुवें कर्टमुण्डन । भीजै भँवरकमलशिरफुन्दन ॥ चुइ चुइ काजर अँचरा भीजा । तवहूँ न पियके रोवैं पसीजा॥ छांड़चला हिरदयँ दयदाहूँ । निठुरनाहँ आपननहिंकाहू ॥ सबै श्रृंगार भीज सुँई बुवा । छोरंमिलायकन्ते नहिं छुवा ॥ दो० रोये कन्त न बहुरे, तेहि रोये का कांज । कन्तधरामनजूझरन, धने साजीसबसाज ॥ खण्ड तैंतालीसवां गोरावादलवर्णन ॥ मँते बैठ बादल औ गोरा । सोमत कीजे परनहिं भोरों ॥ पुरुष न करै नारिमत कांची । जसनौशावाँ कीन्ह न बांची॥ चढ़ा हाथ इसकन्देर वैरी । सकतें छांड़ के भई बँदेरी ॥ सजंगं जोनाहँमारवल कांधा । बुधै कहिये हँस्ती काबांधा ॥ देवतनचलें आय अस आंटी । सुरजनै कञ्चनै दुर्जनै माटी॥ कञ्चन जुरै भये दश खांड़ा । फूटन मिलै और कर भांड़ा॥ जस तुरकहिं राजा छलसाजा । तस हमसाज छुड़ावहिंराजा ॥ दो० पुरुष तहांही छल करै, जहँवल कैसोन आंटँ । लड़ाई १ इरादा २ धुवां ३ सारी ४ छाती ५-७ कुरती ६ जलन ८ ता- विन्द ९-११ धूर १० औरत १२ सलाह १३ नाममंत्री १४ हँसी १५ मर्द १६ नामशाहज़ादी १७ नाम बादशाह १८ उसको छोड़ दिया १६ होशियार २० अक़लमन्द २१ हाथी २२ दोस्त २३ सोना २४ दुश्मन २५ माटी २६ पहुँचना २७ ॥