पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २६७ धन न नयन भर देखा पीऊ । पिया न मिलंधनसोभरजीऊ ॥ तेहिसव आस भरा है केवों । भँवरन तेजै वास रस लेवा ॥ दो० पावनधरा ललाटै धन, विनय सुनहु हो राय । अलकें परा फँदवार है, कैसेहिं तजै न पाय ॥ बांड़ फेटैं धन बादल कहा । पुरुषगवन धन फेट न गहों ॥ जो तुइँगवन आयगजगामी । गवन मोर जहँवाॅमोरस्वामी ॥ जब लग राजा लूट न आवा । भावै वीर शृंगार न भावा ॥ तिरिया भूमि खड्ग की चेरी । जीत जो खड्ग होय तेहिकेरी ॥ जेहिं घर खड्ग मूठ तहँ गाढ़ी । तहां न अंडन मूछ न दाढ़ी ॥ तब मुँह मूछ जीव पर खेलौं । स्वामिकाज इन्द्रासन पेलौं ॥ पुरुप कें २ बोल टरै नहिं पाछू । दर्शनै गयन्द ग्रीवै नहिंकाछू ॥ दो० तुइँ अवलों धन कुबुधैँ बुध, जानैकहाजुभाँरें । जेहि पुरुर्षहि हियें १७ बीररस, भावैतेहिन शृँगार ॥ जो तुमचहो जूझ पिय वाजा । कीन्ह शृंगार जूझ मैं साजा ॥ यौवन आय सौंहें है रोपा । पिघला विरहकामदल कोपा ॥ भयो वीररस सेंदुर मांगा । रातो रुधिर खड्गजस नांगा ॥ भौंहैं धनुप नयन शरैं सांधे । बरनैं बीज काजर बिषबांधे ॥ दय कटाक्ष २३ सों सान सँवारी । औ मुखसेलभाल अनयौरी ॥ अलकें फासग्रिवैं मेलअस्रूझा । अधरैं अधरसों चाहहिंजूझा ॥ कुंभस्थलें कुचैं दोउ मैमन्ता । पेलों सौंहें सँभारहु कन्ता ॥ कमल १ छोड़ना २ माथा ३ बाल ४ कंमर ५ औरत ६ पकड़ना ७ हाथीकी चाल ८ लड़ना ६ ज़मीन १० तलवार ११ मर्द १२-१८ दांतहाथी के १३ गरदन कछुवाकी १४ नादान १५ कमअक़्ल १६ लड़ाई १७ दिल १८ सामने २० लालखून २१ तीर २२ पलक बिजुली की तरह २३ तिरछी नि- गाह २४ नोकीले २५ बाल २६ गर्दन २७ होंठ २८ हाथी मस्त २६ छाती ३० मुक़ाबिल ३१ ॥