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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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२६६ पद्मावत। घाल कचवेची टीका सजा। तिलकजोदेखठाउँ जिउतजा॥ मणिकुण्डलडोलैदुइश्रवनाँ।शीशँधुनहिसुनिसुनिपियगवनाँ॥ नागिनअलकैँ झलकउरेहारू। भयो श्रृंगार कंत बिन भारू ॥ दो० गवन जो आयो पॅवरँ महँ, पिय गवने परदेश । सखीबुझावहिंकिमैअनंल, हुसैसेोकेहिउपदेश॥ मान गवन जस घूँघट काढ़ी। बिनवै आय वारेँ भइ ठाढ़ी ॥ तीपी हेरे' चीर गँहि ओढ़ा। कंतनहेरे' कीन्ह जियपोढ़ा ॥ तबधनेँ कीन्ह बेहँसे चंपै दीठी। बादलैंतवहिँ दीन्ह फिरपीठी ॥ मुख फिराय मन अपने रीसा । चलतनतिरियाकरमुखदीसाँ ॥ भामिने भेष नारिकेँ लेखे। कसपिउ पीठ दीन्ह मुँहदेखे ॥ मँकु पिय दृष्टि समानो चालू। हुलैसे पीठ गढ़ाऊँ सालू ॥ कुचें ताँबी अब पीठ गड़ोऊँ। गहेसि जोहूककाढ़रिसधोऊँ॥ दो० रँहुलजाय तोपिय चलै, कहौंतो कहिमुहिँ दीठँ। ठाढ़ तेवानी काकरों, भारी दोउबसीठँ ॥ लाजकियेजो पियनहिंपाऊं। तजों लाज करें जोर मनाऊं ॥ कर हठ कंत जाय जेहिलाजा। घूँघट लाज आवकेहिकाजा ॥ तब धन बेहँसे कहा गहिफेटा। नारिजो बिनवै कंत न मेटा ॥ आज गवन हूँ आई नाँहां। तुम न कंते गवनो रनमाहां॥ गवनआवधनमिलनकिताई। कौन गवन जो बिछुड़े सांईं॥ नाम नखत १ फान २ शिर ३ बाल ४ छाती ५-२३ दरवाज़ा ६ जाना सिधारना ७ किसतरह ८ आग ६ ड्योढ़ी १० कटीली निगाहसे देखा ११ खींचना १२ देखना १३-१८ औरत बादल की १४ हँसना १५ आँख १६ नाममंत्री १७ औरतका शकुन बदसमागया १६ शायद २० निगाह २१ पीठ देख तसकीनकी २२ खींचाकि दिलका दुख निकल जावे २४ शोख २५ दोनों छाती २६ हाथ २७ हँसना २८ अर्ज़ २६ खाविन्द ३०-३१