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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। ३६५ बादशाह भूमीपति राजा। सन्मुख है न हमीरहिंलाजा॥ बत्तीसलाखतुंरी जेहिसाजहिं। बीससहसहस्तीदल गाजहिं॥ जबहीं आय चढ़े दल ठाटा। देखत जैस गगन घनघटा ॥ चमकहिं खड्ग जोबीजैंसमाना। डमरहिंगलगजहेंहिंनिशाना॥ वरसहिं सेलें बानैं घनघोरा। धीरज धीर न बांधे तोरा ॥ दो० जहां दलपती दलमलहिं, तहां तोरका काज। आज गवन तोर आवै, बैठमान सुखराज ॥ मातन जानेसि बालकेँआदी। हौं बादला सिंहे रन बादी ॥ सुनगजजूहें अधिकजिउतपा। सिंहे जातकहुँरैनाहिं खिपा ॥ तवलग गाजनैं गाज सँडेला। साँहैं शाहसों जुरों अकेला ॥ को मोहिं साँह होय मै मन्ता। फारौं सूँड़ उखारों दन्ता ॥ जरों स्वामैं संकरे जस तारा। ओ बर्ले जस दुर्योधन मारा ॥ अङ्गदकोप पांव जस राखा। टेकों कटकेँ छतीसो लाखा ॥ हनुमत सरस जङ्घपर जोरों। दहौं समुद्र स्वामें बँद छोरों ॥ दो० जो तुम मात जसोदी, मोहिं न जानो बार। जहँ राजा बलबांधा, छोरों पैठ पतार ॥ बादल गवन जूझकहँ साजा। तैसेहिंगवन आय घरबाजाँ ॥ लिये साथ गवने कर चारू। चन्द्रवदन रचकीन्हशिंगारू ॥ मांग-मोति भर सेंदुर पूरा। बैठ मयूरे बाँक तस जूरा ॥ भौंहैं धनुर्पे टकोर परीखी। काजर नयन मारशरतीखी ॥ घोड़ा १ हाथी २ आसमान ३ तलवार ४ बिजुली ५ परहरा ६-१४ गोला ७ तीर ८ बड़े राजा ६ छोटा लड़का १० शेर ११-१३ हाथियों का हलक़ा १२ सामने १५ मस्त १६ मालिक का काम करों १७ नाम महाशूर- वीर १८-१६ फ़ौज २० राजा २१ पहुँचा २२ मोर २३ कमान २४ तीर २५ कटीली २६ ॥