पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ३०१ तुइँ अब राजा लैचल गोरा। हौं अब उलटजेरों झाजोरा ॥ वहँ चौगान तुर्क कस खेला। है खिलार रणजरोँ अकेला ॥ तब पाउँ बादल अस नाउँ । जब मैदान गोय लै जाउँ ॥ दो० आजखड्ग चौगान गँहि, करोंशीश रण गोय। खेलौं सौंहे शाहंसो, हाल जगत महँ होय ॥ तब अगमने है गोराँ मिला। तुइँ राजा लै चल बादलाँ ॥ पिताँ मरे जो सारी साथे । मीच न देय पूतके माथे ॥ मैं अब आंयु भरी और मूँजी। का पछताव आय जो पूँजी ॥ बहुतहिं मार मरों जो जूझी। ताकहँ जन राखहु मनबूझी ॥ कुँवरसहसे सँगगोराँ लीन्हीं। और वीरबादलै सँग कीन्हीं ॥ गोरहिं १४ समुद्र मेघअसगाजा। चला लीन्ह आगेकर राजा ॥ गोराँ उलट खेतभा ठाढ़ा। पूरूँर्ष देख चाउँ मनबाढ़ा ॥ दो० आवकटंक सुलतानी, गगनँ छिपामँसि मांझ। परत आव जग कारी, होत आव दिन सांझ ॥ द्वै मैदान परी अंब गोय। खेलहार वहँ काकर होय ॥ यौवन तुरी चढ़ी जो रानी। चलीजीत अति खेलसयानी ॥ कटि २१ चौगानगोय कुंचै साजी। हियँ मैदान चली लै बाजी ॥ हालै सो करै गोयलै बाढ़ा। गोली दुहुँ पैचकै काढ़ा ॥ भइ पहार वै दोनों गोरी २६। दृष्टि २७ नेर पहुँचत सुठ दूरी ॥ ठाढ़े वाण चलहिं अस दोऊ। शार्लेहिं हिये २६ न काढ़ै कोऊ॥ मुकाबिल १ पकड़ना २ शिर ३ सामने ४ आगे ५ नाममंत्री ६-७ बापकी जगह राजा साथहै ८ मरना बेटेका न देखेगा ६ उमर १० हज़ार ११ नाम मंत्री १२-१३-१४-१५ मर्द १६ चाह १७ फ़ौज १८ आसमान १६ सियाही २० घोड़ा २१ कमर २२ छाती २३ सीना २४ हलचल २५ तथा छाती २६ निगाह २७ सुराख २८ दिल २६ ॥