पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०२ पद्मावत । शालहिं तेहिं जानेसि है ठाढ़ी । शालहिं तासु चहै उठ काढ़ी ॥ दो० मुहमंद खेल प्रेमका, गहिर कठिन चौगान । शीशं नदीजे गोय जिमि², हलनहोय मैदान ॥ फिर आगे गोरैं तब हाँकाँ । खेलों करों आज रणशाकों ॥ हों खेलौं धौलांगिरि ५ गोरा । टरों न टारे अङ्ग न मोरा ॥ सोहौं जैस गगन उपराहीं । मेघ घटा मोहिं देख बिलाहीं ॥ सहसँ शीशशङ्करसँ लेखों । सहसहिंनयन अन्धिमां देखों ॥ चारहुँभुजा चतुर्भुज आजू । कंसं न रहा और को साजू ॥ हों है भीमें आज रण गांजा । पांछे घाल डँकोई १२ राजा ॥ होय हनुमंते यमकातें धाऊं । आजस्वामि शंकरैनियाऊं ॥ दो० है नलेँ नीलैं आजहों, देउं समुद्रमहिं मेंड़ । कटकें शाहकर टेंकों, है सुमेरुँ रण बेंड़ ॥ उनई घटा चहूं २० दिशि आई । छूटहिं वाणैं मेघ झरलाई ॥ डोलै आहिं देवजस आंदी । पहुँची तुर्क चाँदै कहँ वादी ॥ हाथन गहे खडै हरवानी । चमकहिंसेल बीजैंके बानी ॥ साज बाण जनु आवै गांजों । वाँकि डरैशैशैं जनुवाजा ॥ नेजा उठे डरै मन इन्दूँ । आवहिं पाछजान कबहिन्दू ॥ गौरैसाथ लीन्ह सब साथी । जस मैमन्त सूंड विन हाथी ॥ सबमिल पहिलउठौनीलीन्हीं । आवतआय हांक सबकीन्हीं ॥ .. शिर १ बराबर २ ललकारना ३ बहादुरी ४ नामपहाड़ ५ नामनखत ६ हज़ार ७ बराबर ८ चारहाथ ६ नाम राजादैत्य १० नाम महाशूरवीर ११ मंदंद १२ महावीरजी १३ नामकोल्हू १४ मालिकको वचाऊं ५ नामबन्दर जिन्होंने पुल समुद्र में बांधाथा १६-१७ फ़ौज १८ नाम पहाड़ १६ चारों- तरफ़ २० तीर २१ पैदाइशी २२ बराबर २३ तलवार २४ बिजुली २५-२६ नाम राजा सांप २७ शिर २८ इन्द्र २६ ॥