पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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पद्मावत। ३०५ औ तासों सालार सो आये। जेहिं कबरो पांडवेँ बँद पाये ॥ लंधौरै देव धरा जेहि आवे। औ कोमालै वाद कहँ पावे ॥ पहुँचा आय सिंह असवारू। जहां सिंह गोरा बरयारू ॥ मारेसि सांग पेटमहँ धसी। काढ़ेसि हुमुकआंतभुइँ खसी ॥ दो० भाट कहा धनगोरा, तुइँ महिरावण राउ। आंत समेटकर बांधे, तूरी देत है पांउ ॥ कहेसिअंतँ अबमाभुइँ परना। अंतकोनित्तं खेहँ शिरभरना॥ कहिके गरज सिंह असधावा। सुरजा शार्दूल पहँ आवा ॥ सुरंजनै कीन्ह सांगपर घाऊ। परीखङ्गैं जनुपरा निहाऊँ ॥ वज्रकी सांग वज्र का डांड़ा। उठी आगतस बाजा खांड़ा ॥ जानहु वज्र वज्र सों बाजा। सबही कहापरी अबगाजौं ॥ दूसर खङ्गे कंधपर दीन्हीं। सुरजेंवह ओड़नै परलीन्हीं ॥ तीसर खङ्ग कूदपर लावा। कांधगरर्जें हंत घाव न आवा ॥ दो० तस मारा हतगोरें, उठी वज्रकी आग। कोउ नेरे नहिं आवै, सिंहैं सेंदूरो लाग ॥ तस सुरजा कोपा वरबंडी। जान सेंदूर केर भुज दंडा ॥ कोप गरज मारेसि तब बाजा। जानहुपरी तुरतशिरगाजौं॥ टाटैरैं टूट टूट शिर तासू। सैं सुमेरुँ जनूटूट अकासू ॥ धमक उठा सब स्वर्गे पतारू। फिर गइ दीठें फिरा संसारू ॥ भा परलै अस सबही जाना। काढ़ा खङ्गैं स्वर्ग नयराना ॥
नाम सिपहसालार १ नामदेव २ नाम संजा ३ ज़बरदस्त ४-१६ घोड़ा ५ आख़िर ६ हमेशा ७ राख ८ शेरसुर्ख ९ नाम पहलवान १० तलवार ११-१४ निहाई १२ बिजुली १३-२० ढाल १५ उछलतलवार पर तलवार परी १६ शेर १७ शेरसुर्ख १८ खोपड़ी २१ पहाड़ २२ आसमान २३-२६ निगाह २४ तलवार २५ ॥