पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०६ पद्मावत । तस मारेसि सैं घोड़े काटा । धर्ती फांट शेष फणनाथा ॥ अतिजो सिंहैं वरी है आई । शार्दूलै सो कौन बड़ाई ॥ दो० गोरापरा खेतमहँ, सुरै पहुँचावा पान । बादलै लैगा राजा, लै चितौर नियरान ॥ पद्मावत मन रही जो झूरी । सुनत सरोवरैं हियँ गा पूरी ॥ अद्र्रा महँ हुलासै जस होई । सुख सुहाग आदरसा सोई ॥ नयनजोकुमुदिनि लीन्हअँगूरू । उठाकमलअसउगवा सूरू ॥ पुरइन पूर सँवारी पाँती । औशिर आनधरा शिरछाता ॥ लाग्यो उदयहोय जस भोरा । रयनि १२ गईदिनकीन्हअजोरा १३ ॥ अस्ते अस्तकै पाई कलौ । आगोवली कटकै सब चला ॥ देख चांद अस पद्मिन रानी । सखीकुमोदैं सबैविकसानी ॥ दो० ग्रहन छूट दिनेरै कर, शशि २० सो भयो मिलाव । मंदिर सिंहासन साजा, बाजा नगर वधाव ॥ बिहँस चांद दय मांग सेंदूरू । आरत करन चली जहँसूरू ॥ औगोहनैं शशि नखत तराई । चित्तौरकी रानी जहँ ताई ॥ जनु बसन्तऋतु फली जो छूटी । की सावन महँ वीरबहूटी ॥ भा आनंद बाजा पँचतूरा । जगतरातैं है चला सेंदूरा ॥ अति मृदंग मन्दिर बहुवाजे । इन्द्रशब्दे सुन शब्दजोलाजे ॥ देखकन्त जस रवि २६ परकासाँ । पद्मावतमनकमल विकासाँ ॥ कमल पांव सूरजके परा । सूरज कमल आनि शिरधरा ॥ दो० सेंदुर फूल तँबोल सो, सखी सहेली साथ । शेर १ शेरखुर्ख २ देवता ३ नाम मंत्री ४ तालाव ५ छाती ६ नामनखत ७ खुशी ८ कोकावेली ६-१७ सूर्य १० तख्त ११ रात १२ रोशनी १३ रामराम कर १४ कल १५ फ़ौज १६ खिलना १८-२८ सूर्य १६-२१-२६ चाँद २०-२३ साथ २२ लाल २४ आवाज़ २५ रोशनी २७ ॥