पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 308, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। ३०७ धने पूजी पियपांय द्वय, पियपूजी धनमाथ ॥ पूजा कवन देउँ तुम राजा। सबैतुम्हार आवमोहिं लाजा ॥ तनमय यौवन आरति करेऊं । जीव काढ़ न्योछावर देऊं ॥ पन्थे पूरकर दृष्टि बिछाऊं। तुमपगे धरो शीशे मैं लाऊं ॥ राखतपांयपलकनहिं मारों। बरुनिहिं सौरजें चरणहिंझारों॥ हियँ सोमंदिर तुम्हरो नांहां। नयन पंथे आवहुतेहिमांहां ॥ बैठोपांटे छत्र नव फेरी। तुम्हरे गर्व गर्बी हों चेरी ॥ तुम जियमैंतन जो लहिमयों। कहै जो जीय करै सोकयों ॥ दो० जोसूरज शिर ऊपर, तबसो कमल शिरछात। नाहित भरी सरोवरें, सूखी पुरइनपात ॥ परश पांय राजाके रानी। पुनआरत बादले कहँआनी ॥ पूजे बादलं के भुज दण्डों। तुरी केपांउ दाबकरे खण्डा ॥ यह गजगवने गर्व्व सो मोरा। तुम राखा बादले औगोरा ॥ सेंदुरतिलक जो अंकुश रहा। तुम राखा माथे तौ रहा ॥ कालश्यामें तुमजियपरखेला। तुमजियआनमँजूषों मेला ॥ राखाछात चमर औ दारा। राखा क्षुद्रघंटे झनकारा ॥ होय ध्वजा हनुमंत तुम पैठी। तब चितौर लै आये बैठी ॥ दो० पुनि गजमत्ते चढ़ावा, नेते बिछाई लाट। बाजतगाजत राजा, आय बैठ सुख पाँटे ॥ तस राजें रानी कंठलाई। पिय मरजियानारि जनु पाई ॥ पद्मावत १ राह २-१० निगाह ३ पांव ४ शिर ५ पलक ६ घूर ७ दिल ८ खा- विन्द ९ तख्त ११-२८ ग़रूर १२ मुहब्बत १३ बदन १४ तालाव १५ नाममंत्री १६-२२ बाजू १७ घोड़ा १८ हाथ १६ हाथी की चाल २० ग़रूर २१ खाविन्द २३ सन्दूक २४ नाम जेवर २५ हाथी २६ जे़रअन्दाज़ २७ गले लगाई २६ ॥