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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । ३११ सेंदुरपरा जो शीशे उघारी । आग लाग चहि जगै अँधियारी ॥ यहादिवसै हौं चाहत नाहीं । चलो साथ पियदै गलबाहं ॥ सारसपंख नहिं जिये निरोरे । हौं तुम बिन का जियों पियारे ॥ न्योछावर कै तन छहाराँऊँ । छारँ होऊँ सँग बहुरें न आऊँ ॥ दो० दीपक प्रीति पतंगज्यों, जन्मनिबाह करेउँ । न्योछावर चहुँपास है, कण्ठलाग जियदेउँ ॥ खण्ड सैंतालीसवां सतीहोना पद्मावत और नागमतीका ॥ नागमती पद्मावत रानी । दोउ महासत सती बखानी ॥ दोउं सौत चढ़ खाट जो बैठी । औ शिवलोक परातहँदीठी ॥ बैठो कोइ राज औ पाटों । अन्तै सबै बैठे पुनि खाटा ॥ चन्दन अगर काढ़सरै साजा । औ गँतें देय चले लैराजा ॥ वाजन बाजहिं होय अगोतौं । दोउ कन्तलै चाहे सोता ॥ एक जो बाजा भयो विवाहू । अब दुसरे है और निबाहू ॥ जियतजलैं जो कन्तै कीआंसा । मुये रहस बैठे इकपासा ॥ दो० आज सूरै दिन अथयो, आजरैनि शशि बूड । आजनाच जियदीजिये, आज आगिन हमजूड़ ॥ सैं रच दान पुण्यबहु कीन्हा । सातबार फिरसांवर लीन्हा ॥ एक जो भांवर भयो बियाही । अब दूसर है गोहनैं जाही ॥ जियत कन्तै तुम हमगललाई । मुये कण्ठ नहिं छांडुहुसाई ॥ १ शिर २ दुनियां ३ दिन ३ खाविन्द ४ अलग ५ बिथराना ६ राख ७ लौट ८ पद्मावत-नागमती ९ नज़र १० तख़्त ११ आख़िर १२ चिता १३ दाह १४ लड़का १५ ख़ाविन्द १६ सूर्य १७ रात १८ चांद १६ चिता २० साथ २१ खाविन्द २२ ॥