पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ३१ पावा रूप रूप जस चहा । शशि$^{१}$ मुख सब दरपन है रहा ॥ दो० नयन$^{२}$ जो देखे कमल भये, निरमलै नीर$^{३}$ शरीरँ । हस्त$^{५}$ जो देखे हँस भये, दशनँ$^{६}$ जोति नग हीर ॥ खण्ड पद्मावति तहँ खेल दुलारी । सुआँ मंदिर महँ देखि मँजारी ॥ कहिसि चलौं जौलहि तन पांखा । जिव लै उड़ा ताक बन ढांखा ॥ जाय परा वन खंडँ$^{९}$ जिव लीन्हा । मिले पंखे$^{१०}$ बहु आदर कीन्हा ॥ आन धरी आगे फरशाखा । भुक्ति$^{११}$ न मिटी जबलहि राखा ॥ पाय भुक्ति$^{१३}$ सुख मन में भयो । दुख जो अहा बिसर सब गयो ॥ ए गुसैयाँ तू ऐसो विधाता$^{१४}$ । जानवंत जिव सब का भुकेँ दाता ॥ पाथर महँ नहिं पतंग बिसारा । जहँ तहँ सँवर दीन्ह तुइँ चारा ॥ दो० तौलहि साग बिछोह कर, भोजन पड़ा न पेट । पुनि बिसरा भा सँवरना, जनु सपने भइ भेंट$^{१५}$ ॥ पद्मावति पहँ आय भँडौरी$^{१६}$ । कहिसि मंदिर महँ परी मँजारी ॥ सुआँ जो उत्तरँ$^{१७}$ देत अहा पूंछा । उड़गा पिंजर न बोलै छूछा ॥ रानी सुना जो सुख सब गयो । जनु निशि$^{२०}$ परी अस्त दिन भयो ॥ गहने गही चन्द की किरा । आंसु गगनँ$^{२२}$ जस नखतहिं भरा ॥ टूटिवार सरवरँ$^{२३}$ बह लागे । कमल बूडि मधुकरैँ$^{२४}$ उड़ भागे ॥ यहिविधि आंसु नखत हो चुये$^{२७}$ । गगनँ छांड सरवरँ महँ उये ॥ भरहिं चुवहिं मोतिन की माला । अव संकेत बाँधा चहुपालाँ ॥ दो० उड़गा सो ठाँ कहँ बसा, खोज सखी सो तास ॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes): चांद १ आंख २ पांक ३ पानी ४ बदन ५ हाथ ६ दांत ७ तोता ८-१६-२६ चिड़ी ९-१८ जंगल १० उड़ने वाले जानवर हमजिन्स ११ खुराक जंगली १२-१३ ईश्वर १४ रोजी देने वाला सबका १५ मुलाक़ात १६ रसोईवरदार १७ जवाब २० राति २१ आसमान २२-२५ तालाव २३-२६ भँवर २४ रंज २७ चारों तरफ २८ ॥