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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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वहहै धर्ती¹ की स्वर्ग² का, पवन³ न पावै वास ॥ चहूँ पास समझावहिं सखी । कहांसु अव पावेगा पखी ॥ जवलहि पिंजर अहा परेवों । अहा बांध कीन्हेसि नितसेवा ॥ तेहि बन घन जो छूटेपावा । पुनिफिरवां दै होय कितआवा ॥ वै उड़ाम फुरहरी खाई । जो भा पंख पांख तनलाई ॥ पिंजर जेहक सौंप तेहिगयो । जो ज़ाकर सो ताकर भयो ॥ दशबाटें⁵ जेहि पिंजरमाहां । कैसे बांच मँजारी⁶ पाहां ॥ ये धर्ती अस कंतन लीले । अश्वपति⁸ गजपतिबहुवरकीले ॥ दो० जहँ न राति नहिंदिवर्स है, तहां न पान न खांन । तेहि बन सोतों है बसा, फेरि मिलावै आन ॥ सुवै¹¹ तहां दिनदश कैलकाटी । आयो व्याधै ढुका लै ठाटी ॥ पैगें पैग भुइँ चापत आवा । पंखहि¹⁴ देखि सबै डरखावा ॥ देखो कुछ अचरज अनभलौं । तरवरै एक आवत होचला ॥ यह बन रहंत गये हम आऊँ । तरवरै चलत न देखा काऊ ॥ आजजोतरवरे चलभलनाहीं । आवहु यह बनछांड़ पराँहीं ॥ वैतो उड़ै और बन ताका । पण्डितसुओं भूल मन थाका ॥ शाखा देखि राज जनु पावा । बैठिनिचिंते चूल्हा वह आवा ॥ दो० पांचे बाणकर खोंचा, लासा भरे सो पांच । पांखभरा तन उरझा, कित पारधिन बांच ॥ बन्दभौं सुओ करतसुखकेली । चूरै पंखमेलेसि घरठेली²७ ॥ ज़मीन १ आसमान २ हवा ३ उड़नेवाला जानवर ४-१४ ताबेदार वा क़ैदी ५ दशराह तथा इन्द्री बदनके सुराख ६ बिल्ली ७ घोड़े का सवार ८ दिन ६ तोता १०-११-२१-२५ बहेलिया १२ क़दम बाक़दम १३ बुरा १५ पेड़ १६- १८-१६ उमर १७ भागना २० ग़फ़िल २२ कंपा २३ क़ैद २४ बाजू को तोड़के २६ मोरी २७ ॥