पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ पद्मावत। दो० हाँ ब्राह्मण औ पण्डित, कहि आपन गुण सोय। पढ़ेके आगे जो पढ़े, दून लाभै तेहि होय॥ तब गुण मोहिं अहा हो देवा। जब पिंजर हुत छूट परेवां॥ अवगुणकौनजोबँदै यजमाना। घाल मँजूसाँ बेंचै आना॥ पण्डित होय सो हाटैं नहिं चढ़ा। चहौं बिकाय भूलगा पढ़ा॥ दुइ मारग देखौं यह हाटाँ। दई चलावै वेहि केहि वाटाँ॥ रोवत रक्त भयो मुख रातों। तनभा पियर कहों का बाता॥ राती श्याम कण्ठ दुइग्रीवा। तेहि दुइ फन्द डरों शठजीवां॥ अबहूं कण्ठ फन्दकें चीन्हा। दुहूँके फन्द चाहै का कीन्हा॥ दो० पढ़ि गुण देखा बहुत मैं, है आगे डर सोय। धुन्धजगतैं सबजानकै, भूलरहा बुद्धि खोय॥ सुनि ब्राह्मण बिनवौ चिरहारूँ। करि पंखहिं कहँ मयाँ न मारू॥ कतर्ये निठुर जिवबधेसि परावा। हत्याकेर न तोहिं डेरावा॥ कहेसि पंखैं का दोषैं जनाँवा। निठुर सोई सो परमसैं खावा॥ उनहिं रोय जानिके रोना। तहूँ न तजहिं भोगसुखसोना॥ औ जानहिं तन होय यह नासू। पोषै मांस पराये मांसू॥ जो न होहिं अस परमसैं खाधू। कितपंखन कहँ धरै बियाधू॥ जोरी व्याधै पंखनि नितधरे। सो निश्चिन्तै मन लोभै न करे॥ दो० ब्राह्मण सुआँ बेसाहा, सुनि मत वेदगरंथै। मिलाआय सोसाथिनकहँ, भा चितोरकी पँथै॥ फ़ायदा १ जानवरपरिन्द २ क़ैद ३ संदूक़ ४ बाज़ार ५-७ राह ६-८ खून ६ लाल १०-११ काला १२ गला १३ दुनियां १४ अक़्ल १५ ख़ुशामद १६ चिड़ीमार १७ उड़नेवाले जानवर १८-२२-२८-३१ मेहरबानी १९ बे दर्द २०-२४ मारडालना २१ पाप २३ पराया मांस खानेवाले २५-२७ छोड़ना २६ बहेलिया २६-३० ग़ाफ़िल ३२ लालच ३३ तोता ३४ पोथी ३५ राह ३६॥