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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत। ३७ तबलौंग चित्रसेन शिवसाजो। रतनसेन चित्तौर भा राजा ॥ आय बात तेहि आगे चली। राज बणिज आये सिंहली ॥ हैं गज मोति भरी सब सीपी। और वस्तु बहु सिंहलदीपी ॥ ब्राह्मण एक सुआ लै आवा। कंचनबरण अनूप सुहावा ॥ राती श्याम कंठ दुइ कांठा। राती डहन लिखा सब पाठा ॥ औ दुइ नयन सुहावन रांता। राँती ठोर अँगूरसबता ॥ मस्तक टीका कांध जनेऊ। कबि ब्यास पण्डित सहदेऊ ॥ दो० बोल अर्थ सों बोली, सुनत शीश सब डोल। राजमन्दिरमहँ चाही, अस वह सुआ अमोल ॥ भयो रजायसु जन दौड़ाए। ब्राह्मण सुआ बेगि लै आये ॥ विप्र अशीश बिनत औधारा। सुआजीवनहिं करों निरारों॥ पै यह पेट महाबिस्वांसी। जैसबनावा तँपी संन्यासी ॥ दौरे सेज जहां कुछ नाहीं। सुइँ पर रही लाय गै बाहीं ॥ अन्धहिरही जो देखननयनौं। गूंगरही मुख और न बयनौं ॥ बहिररही जो श्रवण नहिं सुना। पै यह पेटन रहे निरगुनों ॥ कई कईफेरा नित्तै यह दोषे। बारहिं बार फिरै सन्तोषै ॥ दो० सो मोहि लिये मँगावै, लावै भूख पियास। जो न होत अशनै बैरी, केहि काहूकी आस॥ सुऐं अशीश दीन्ह बड़साजू। बड़ परताप अखण्डितैराजू ॥ भागवन्तविधि बुद्धि अवताराँ। जहांभागतहँरूपजोहारौं ॥ १ मरना २ सौदागर ३ हाथी ४ सोना ५ लाल वा काला ५ आंख ६-१६ लाल ७ लालचोंच ८ अमृत ९ शिर १० हुक्म ११ नौकरलोग १२ जल्द १३ ब्राह्मण १४ अलग १५ ज़बरदस्त १६ तपकरनेवाले १७ औरत १८ आवाज़ २० कान २१ नादान २२ हमेशा २३ दरवाज़ा २४ पेट २५ हमेशा राज क़ायम २६ ब्रह्मा २७ अक्ल २८ पैदा करना २६ देखना ३० ॥