भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 39, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 39

३८ पद्मावत । कोइ केहिपास आसके गवनाँ । जोनिराशदृढ़ आसनमवनाँ ॥ कोइ बिन पूँछे बोल जो बोला । होय बोल माटी के मोला ॥ पढ़िगुणिजितने पण्डितमतिभेऊ । पूँछे बात कहै सहदेऊँ ॥ गुणी न कोई आप सराहाँ । जो सो बिकाय ज्ञानसो जाहा ॥ जबलग गुण प्रगट नहिं होय । तबलग मर्म न जानै कोय ॥ दो० चतुरवेद हों पण्डित, हीरामन मोहिं नाउँ । पद्मावति सों मेरदों, सेवकहों तेहि ठाँउँ ॥ रतनसेन हीरामन लीना । एकलाख ब्राह्मण कहँ दीन्हा ॥ बिप्रै अशीशजोकीन्हपयानाँ। सुआ जो राजमँदिरमहँआना ॥ बैरणो काहि सुआ की भाखा । दीन्ह सुनाउँ हीरामन राखा ॥ जो बोलै राजा मुखजोवौ । जानौ मोतिन हार पिरोवा ॥ जो बोलै सब माणिक मूंगा । नाहित मवनै बांध है गूंगा ॥ जनुहि मारमुख अमृत मेला । गुरुहै आप कीन्ह जगैचेला ॥ सूर्य चांद की कथा कहा । प्रेमकी कहनलाय चितगहा ॥ दो० जो जो सुनै धुनै शिर राजा, प्रीति होय अगाह । असगुणवन्त नाहिं भल, सोतों बावर कीजे काह ॥ दिन दशपांच तहां जो भये । राजा कतहूँ अहेरे गये ॥ नागवती रूपवन्ती रानी । सब रनिवास पाटपरधोनी ॥ कियश्रृंगार करें दरपनलीन्हा । दरपन देखिगँर्ब जेहि कीन्हा ॥ बोलहु सुआ पियारे नाहो । मोरे रूप कोउ जगै माहा ॥ जाना १ मज़बूत २ चुप ३-१५ राजायुधिष्ठिर के भाई ४ तारीफ़ ५ ज़ाहिर ६ भेद ७ चारोंवेद ८ मुलाक़ात ६ जगह १० ब्राह्मण ११ कूच १२ तारीफ़ १३ देखना १४ दुनियाँ १६ तोता १७-२३ शिकार १८ महारानी १६ हाथ २० गरूर २१ खोविन्द २२ संसार २३ ॥