पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 43, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें४४ | पद्मावत । औ बहुत तहां जो पद्मिनी लोनी १। घर घर सबके होहिं जस होनी ॥ दो० सबै बखानें तहां कर, कहंत सो मोसों आव । चहौं दीप वह देखा, सुनत उठा तस चाव ॥ का राजा हौं बरैनौं तासू । सिंघलदीप अह्रै कैलासू ॥ जो गा तहां भुलाना सोय । गये युग बीत न बहुरा कोय ॥ घर घर पद्मिनि छत्तीस जाती । सदा बसंत दिवसै अरु राती ॥ जेहिं जेहिं बरनैं फूल फुलवारी । तेहिं तेहिं वरनं सुगन्ध सुनारी ॥ गन्ध्रपसेन तहां बड़ राजा । अप्सरैंहिं माहिं इन्द्रासन साजा ॥ सो पद्मावत ताकी बाँरी । औ सब दीप माहिं उजियारी ॥ चहूँखण्ड के वर जो आहीं । गर्वहिं १० राजा बोलहिं नाहीं ॥ दो० उदित सूरै जस देखी, चांद छिपै जेहि धूप । ऐसे सबै जाहिं छिप, पद्मावत की रूप ॥ सुनि रबि १२ नाँउ रतनैं भारती १३। पण्डित वही फेर कहु बाता ॥ तुइ सुरङ्ग मूरति वह कहीं । चितमहँ लाग चित्रैं हैरही ॥ जनु होय सूर्य आय मनबसे । सब घटपूर हिये १६ परगँसे ॥ अबहूँ सूर्य चांद वह छाया । जल बिन मीनें रक्त बिन काया ॥ करनें करान आ प्रेम अँगूरू । जो शेशि स्वर्ग चढ़ौं होय सूरू ॥ सहसें किरन रूपमन भूला । जहँ जहँ दृष्टि २५ कमल जनु फूला ॥ तहां भँवर जहँ कमला गन्धी । भइ शाशी २६ राहुकेर ऋण बन्धी ॥ दो० तीन लोक खण्ड चौदह, सबै परै मोहिं सूझ । खूबसूरत १ तारीफ़ २-३ दिन ४ रंग ५-६ इंद्रलोककी परी ७ लड़की ८ चारों तरफ़ ६ ग़रूर १० सूर्य ११-१२-२३ राजारतनसेन १३ दीवाना १४ तसवीर १५ दिल १६ खिलना १७ मछली १८ वदन १९ नसनस में २० चांद २१-२६ आसमान २२ हज़ार ज्योति तथा पद्मावत २४ निगाह २५ ॥