पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ४१ कान टूटि जेहि आभरणें, का लै करब सुसोन ॥ राजा सुनि बियोगं तसमाना । जैसेहियँ बिक्रमे पछिताना ॥ वह हीरामन पण्डित सुवा । जो बोलै मुख अमृत चुवा ॥ पण्डित दुखखण्डित निरदोषा । पण्डित हियेँ परै नहिं धोखा ॥ पण्डित केर जीभ मुख शोधे । पण्डित बात न कहैं विरोधै ॥ पण्डित सुमति दै पन्थँहि लावा । जोकुपंथ तेहिपण्डितनआवा॥ पण्डित राती बदन सरेखा । जो हत्यार रुहिरै पै देखा ॥ की प्रान घट आनहि मेती । की जलिहोहिं सुआ संग सती ॥ दो० जन जानहुकि ये अवगुण, मंदिर होय सुखराज । आयसु मेट कन्तै कै, काकर भय न अकाज ॥ चांद जैस धनि उजेर अहे । भा पिउरोष गहन अस गहे ॥ परमसुहाग निवाहन पारी । भावै धाग सेवा जब हारी ॥ इतनक दोषैं वीरज पिउ रूठा । जो पिउ आपन कहै सुझूठा॥ ऐसे गर्व नहिं भूलै कोई । जेहि डर बहुत पियारो सोई ॥ रानी आय धौय के पासा । सुआ भवा सेमर की आसा ॥ पराप्रीति कंचन महँ सीसा । बिथरन मिले श्याँम पै दीसा ॥ कहां सुनार पास जेहि जाऊँ । दे सुहाग करै इक ठाँऊँ ॥ दो० मैं पिय प्रीति अरोसे, गर्व कीन्ह जिव माहँ । तेहिरिस हों परहेली, नगररोप की नाँहँ ॥ उत्तर धाय तब दीन्ह रिसाई । रिसआपहिंबुधि अवरहिंखाई ॥ ज़ेवर १ दुख २ दिल ३-५ राजा विक्रमादित्य ४ बेहूदा ६ राह ७ बद राह ८ लालमुँह ६ खून १० नागमती रानी ११ हुक्म १२ खाविन्द १३- २०-२४ रानी १४ छोड़ना १५ क़सूर १६ गरूर १७ लौंडी १८-२६ सोना १६ जगह २१ अहंकार २२ दूर २३ जवाब २५ अक़्ल २७ ॥