पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२ पद्मावत।
मैं जो कहा रिस करहुन बाला। कोन गयो यहि रिस कर घालाँ ॥ बिरस बिरोध रसहि पै होई। रिस मारै तेहि मार न कोई ॥ तुइ रिस भरी न देखेसि आगू। रिसमहँ काकहँ भयो सुहागू ॥ जेहि रिस तेहि रस जोग न जाई। बेरस हरैदि होय पीराई ॥ जेहिके रिस मिलाय रस दीजै। सो रस तज रिस कोह न कीजै ॥ कंतै सुहाग की पाई साधा। पावै सो जो वही चित बांधा ॥ दो० रहै जो पियकी आयसु, और बरती होय हीन। निरमर्ल देखै चांद जस, जन्म न होय मलीनँ ॥ जुवाहार मन समुझी रानी। सुआ दीन्ह राजाकहँ आनी ॥ नागमती हौं गर्व न लीन्हा। कंत तुम्हार भर्म पिय लीन्हा॥ सेवा करै जो बारहमासा। अतनकि अवगुण करै नियासों ॥ जो तुम देइ नाय के ग्रीवों। छांड़हि नहिं बिन मारे जीवा॥ मिलतहि महँ जन अहो निरौरे। तुमसो अहो अदेशों पियारे ॥ मैं जाना तुम मोहे माहां। देखों ताक तो हौ सबमाहां ॥ का रानी का चेरी कोई। जेहिकहँ मयौ करै भल सोई ॥ दो० तुम सों कोई न जीता, हारा बिक्रर्म भोजँ। पहिले आपहिं खोयकर, करै तुम्हारा खोज ॥ राजै कहा सत्य कहु सुआ। बिनसत कस जस सेंमर भुआ ॥ हो सुख रौती कहो सत बाता। जहाँ सत्य तहँ धर्म संघाता ॥ बांधी सृष्टि १८ अहै सतकेरी। लक्ष्मी अहै सत्य की चेरी ॥ सत्य जहाँ साहस सिधि २० पावा। औ सतबौंदी पुरुष कहावा ॥
पाद-टिप्पणी (Footnotes): औरत १ खराब २-११ हल्दी ३ खाविन्द ४-६ हुक्म ५ पाकसाफ़ ६ मैला ७ गरूर ८ भेद १० गरदन १२ अलग १३ सारा जहान १४ मुहब्बत १५ राजा बिक्रमाजीत १६ नामराजा १७ लाल १८ दुनियां १६ कामिल २० सच बोलनेवाला २१ मर्द २२॥