पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६ पद्मावत । खण्ड सातवां श्रृंगारखण्ड पद्मावत ॥ का शिंगार वह बरर्णौं राजा । वहक शिंगार वही पै छाजा ॥ प्रथमे शीशँ कस्तूरी केशौँ । बलि बासुकिको और नरेशाँ ॥ भँवरकेश वह मालति रानी । विषहरँ लरहँ लेहिँअर्घौनी ॥ बेनी छोरि भार जो बारा । स्वर्ग पताल होय अँधियारा ॥ कोमलँ कुटिलँ केशँ नगकौरे । लहरे भरी भुअँगँ बैसारे ॥ बेधीजानि मलैयंगिरि वासा । शीशँ चढ़ी लोटहिँ चहुँपासा ॥ घुंघुरवार अलकें विषै भरे । संकरें प्रेम ज्यों गैयें परे ॥ दो० असफँदवार केशँ वै राजा, पराशीशँ मैं फांद । अष्टोकुलीनार्ग सब डरके, भये केशँ के बांदें ॥ बरैनौँ मांग शीशँ उपराहीं । सेंदुर असै चढ़ा जेहि नाहीं ॥ बिन सेंदुर अस जानहिं दिया। उजेरपंथे रैयैनि महँ किया ॥ कंचन रेख कसौटी कसी । जनु घनमहेँ दामिनि परगँसी ॥ सूर्य्यकिरणजनुगगनैँ बिशेखी। यमुना मांझ सरस्वती देखी ॥ खांड़े धार रुधिरँ जनु भरा । कर्रवँट ले बेनी पर धरा ॥ तेहि पर पूर धरे जो मोती । यमुना मांझ गङ्गाकी सोती ॥ कर्रवँट तपौँ लीन्ह होय चूरू । मगैँ सुरुधिरै लेदेइ सेंदूरू ॥ दो० कनकँ द्वादशँ बानि होय, चही सुहाग वह मांग । सेवा करहिं नखत शेशि तरैई, उवै गगनँ तस मांग ॥ तारीफ़ १ पहिले २ शिर ३-२०-२६-३२ मुश्क ४ बाल ५-६-१६-२६- २५-२६ न्योछावर ६ नामसांप ७ आदमी = सांप १०-१७-१८ खुशबू ११ चोटी १२-४१ आसमान १३-३८-५० मुलायम १४ पेचदार १५ चन्दन १६ ज़हर २२ जंजीर २३ गरदन २४-२७ नाम सांप २८ गुलाम ३० तारीफ़ ३१ राह ३३ रात ३४ सोना ३५-४६ बिजुली ३६ चमक ३७ ख़ून ३६-४५ लोटके ४० नाम जगह जहाँ शिर कटाते हैं ४२ फ़क़ीर ४३ शायद ४४ ख़ालिस ४७ चांद ४८ नखत ४६ ॥