पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ पद्मावत । परबतैं^१ ढहिदेखत सबलोगू । चांटहिं^२ करहिहस्तैं^३ सरयोगू ॥ बज्रहि^४ तिनकहिं मार उड़ाई । तिनैं वज्रै करि देइ बड़ाई ॥ ताकर कीन्ह न जानै कोई । करै सोइ जो मन चिन्तन होई ॥ काहू भोगभुक्ति^५ सुख सारा । काहू भूख बहुत दुख मारा ॥ दो० सबै नाशँ^६ वह इस्थिर^७, ऐसो साज जेहिकेर । एक साँजी औ भाजी^८, चहै सवारै^६ फेर ॥ अलखँ^१० अरूप अवरन सो कर्त्ता । वह सबसों सब वह सों बेर्त्ता ॥ प्रकटैं^११ गुप्तैं^१२ सो सर्वव्योपी^१३ । धर्मी चीन्ह न चीन्है पापी ॥ ना वह पूत नहिं पिता न माता । नावहु कुटुँबन कोइसंगनाता ॥ जनौं^१४ न काहि न कोइवैजनौँ^१५ । जहँलगसब ताकी सिरजनौँ^१६ ॥ वै सब कीन्ह जहांलग कोई । वहनहिं कीन्हकाहुकर होई ॥ हति^१७ पहिले औ अबहै सोई । पुनि सो रहै रहै नहिं कोई ॥ और जो होय सो बावर अन्धा । दिन दुइ चारि मरै कर धन्धा ॥ दो० जो वह चहा सो कीन्हेसि, करै जो चाहै कीन्ह । बरजनहारँ^१८ न कोई, सबै चाहि जेउ दीन्ह ॥ बिनंबुंधि^१९ चहिजोकरहोय ज्ञानू । जसपुराणमहिं लिखाबखानू ॥ जीव नाहिं पै जिये गुसाईं । करै^२० नाहीं पै करै सबाई^२१ ॥ जीभ नाहिं पै सबकुछ बोला । तन नाहीं सब ठाहरैं^२२ डोला ॥ श्रवणैं^२३ नाहिं पै सबकुछ सुना । हियौँ^२४ नाहिं पै सबकुछ गुना^२५ ॥ पहाड़ १ चींवटी २ हांथी ३ पत्थर ४-५ रोज़ी ६ नाश होनेवाला ७ क़ायम ८ बनाना और बिगाड़ना ६ जिसको कोई न देखसके १० नज़दीक ११ ज़ाहिर १२ छिपा १३ सब चीज़ में बिराजमान और सब चीज़ उसमें मौजूद १४ पैदा होना १५-१६ पैदायश १७ पहिले था १८ मना करने वाला १६ अक़्ल २० हाथ २१ सब २२ जगह २३ कान २४ दिल २५ ॥