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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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[Page-header] पद्मावत। २ नयनं नाहिं पै सबकुछ देखा । कौनभांति असजाय विशेखा॥ ना कोई है वह की रूपा। नावहरसो कोई आहि अनूपा॥ ना वह ठाउँ न वह बिनठाउँ। रूपरेख बिन निरमले नाउँ ॥ दो० ना वह मिला न बेहरा, ऐसो रहा भरिपूर । दृएवन्तै कहँ नेरे, अंधहि मूरख दूर ॥ और जो दीन्हेसिरतन अमोला। ताकर मर्म न जानै भोला ॥ दीन्हेसिरसना औ रसभोगू। दीन्हेसिदशनजो बिहँसे योगू दीन्हेसिजग देखनकहँ नयनाँ। दीन्हेसि श्रवणैं सुनेकहँ बयनाँ॥ दीन्हेसिकण्ठ बोल जेहिमाहां। दीन्हेसि करपल्लव बरबाहां ॥ दीन्हेसिचरण अनूप चलाहीं। सोजानै जेहि दीन्हेसि नाहीं॥ यौवन मरम जानिपै बूढ़ा। मिला न तरुणा या जग ढूँढ़ा॥ सुख कर मरमै न जानै राजा। दुखीजानि जाकहँ दुख बाजा॥ दो० काया कामरमै जानिपै रोगी, भोगी रहै निचन्तै। सबकर मरम गुसाँई जानै जो घटघट रहै तन्तै॥ अति अपार करताकर करनी। बरणन कोई पावै बरना ॥ सात स्वैरंग जो कागद करै। धरती समंदर मसै भरै ॥ जानवन्त जगसाखा बन ढांखा। जानवन्त कैरौँ रँदै नौँ पंख पांखा॥ जानवन्त खेहँ रहै दुनयाई। मेघैं बूंद औ गगन तंराई ॥ सब लिख नीकी लिख संसारा। लिखि न जायगतिसमुद्रअपारा॥ = आँख १ कौन तरह २ मुक़ाबिल जिसका कोई नहीं ३ जगह ४ पाक साफ़ ५ अलग ६ देखनेवाला ७ नादान ८ ज़वाहिर ६ भेद १० जीभ ११ दांत १२ हँसने के लिये १३ आँख १४ कान १५ आवाज़ १६ हाथ की अंगुली व हथेली १७ पैर १८ जिसकी मिसाल न हो १६ जवानी २०-२२ क़दर २१ भेद २३ २५-२७ बदन २४ बेफ़िक्र २६ ईश्वर २८ जिसका पारावार न हो २६ बयान करना ३० आसमान ३१ ज़मीन ३२ सियाही ३३ बाल ३४ दांत ३५ बालू ३६ माटी ३७ बादल ३८ आसमान ३६ नखत ४० ॥