पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ५६ दो० चला भीखि मांगने कहँ, साजकिया तप योग । सिद्धिहोय पद्मावत पाये, हृदयँ जबकि बियोग ॥ गणकैकहहिं करगवन न आजू । दिन लै चलहिं होयसिधकाजू ॥ प्रेमलुब्ध दिन घड़ी न देखा । तब देखी जब होय सरेखा ॥ जेहितन प्रेम कहां तेहि मासू । काया रक्त न नयनहि आंसू ॥ पण्डित भुलान न जानहिचालू । जीवलेत दिन पूँछ न कालू ॥ सती कि बौरी पूँछै पांडे । औ घर बैठि नसैं तैं भांडे ॥ मरिजो चलै गङ्गा गति लेइ । तेहि दिन कहां घड़ी को देइ ॥ मैं घर वार कहां कर पावा । घरकार्यों पुनि अन्ते परावा ॥ दो० होरे पखेरू पंखी, जेहि वन मोर निवाहि । खेलचला तेहि वन कहँ, तुम अपने घरजाहि ॥ चहुँदिशे आनसो डौंड़ी फेरी । भइ कट्केई राजा केरी ॥ जानवन्त अहहि सकलें दरकानौ । सांभरलेहु दूरहै जाना ॥ सिंहलद्वीप जायसब चाहा । मोल न पावब जहां बिसाहा ॥ सबनिवहै पुनि आपन सांठी । सांठी बिनसोरहँ सुखमाठी ॥ राजा चला साज कै योगू । साजो बेगेँ चलें सबलोगू ॥ गैर्बजो चढ़ीतुरौ केपीठी । अबमुइँच लहुस्वर्ग सोडीठी ॥ मंत्रों लीन्ह होहु सँग लागू । गुदरजाय सबहो यह आगू ॥ दो० का निश्चिन्तै रे मनै, अपनी चिन्ता आछ । लेह सजगेँ आ आगमनैं, पुनि पछतास न पाछ ॥ कामिल १-२ दिल ३ दुःख ४ नजूमी ५ पूरा ६ दीवाना ७ होशियार ८ बदन ९-१० आखिर ११ चारोंतरफ़ १२ फ़ौज १३ सब १४ अरकानदौलत १५ पूँजी १६-१७ जल्द १८ गरूर १६ घोड़ा २० आसमान २१ निगाह २२ सलाह २३ ग़ाफ़िल २४ फ़िकिर २५ होशियार २६ पहिले २७ ॥