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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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५८ पद्मावत। गुरु बिरह चिनगी पै मेला। जो सुलगाय लिये सो चेला॥ अबकी पतङ्गे भृङ्ग की करौं। भँवर होऊँ जेहि कारन जरा॥ दो० फूल फूल फिर पूँछौं, जो पूँछौं वह केतें। तन न्यौछावर कै मिलौं, ज्यों मधुकैरै जिउदेत॥ हिन्दूमीतैं बहुत समझाया। मान न राजा गवन भुलावा॥ उपजै प्रेमपीर जेहि आये। परबुधि होत अधिकै सोआये॥ अमृत वात कहत बिष जाना। प्रेमको वचन मीठ कै माना॥ जो वह बिषे मारिकै खाय। पूँछौ ताही प्रेम मिठाय॥ पूँछौ बात भरथंरहि जाय। अमृतराज तँजो विषखाय॥ औ महेशैं बड़ सिद्ध कहावा। उनहूँ विषे कण्ठ पै लावा॥ होतउयो रबि किरण निकासा। हनुमन्तहोय को देइसुआसा॥ दो० तुमसब सिद्धि मनावहु, होय गणेश सिधिलेहु। चेला कीन चलावै, तुलै गुरू जेहि भेहु॥ तजौं राज राजा भा योगी। केरै किंकरी तन कियो वियोगी॥ तन बिसभेरैं मनबावरलटा। उरझा प्रेम परी शिर जटा॥ चन्द्रबदनै औ चन्दनदेहा। भस्म चढ़ाय कीन्ह तनखेहौँ॥ मेखलँ सिंहे चक्र ढिंढारे। लीन्ह हाथ तिरशूल सँभारे॥ कंथों पहिर दण्ड केरै गहौँ। सिद्धिँ होयकहँ गोरखेँ कहा॥ मुद्रौं श्रवणैं करँठे जपमाला। केरैउहियां कांध सिंहंछाला॥ पांवरेँ पायलीन्ह शिर छाता। खप्पर लीन्ह भेषै कै रातौँ॥ ┈┈ परवाना १ नामकीड़ा २ मानिन्द ३ केतकी ४ भँवरा ५ दोस्त ६ नसी- हत ७ बहुत ८ वांत ६ राजाभरथरी १० छोड़ना ११-१४ महादेवजी १२ सूर्य १३ हाथ १५-२२ दुःखी १६ बेकरार १७ मुँह १८ राख १६ मस्तहाथी २० गुदड़ी २१ पकड़ना २३ पूराहोना २४ नामफ़क़ीरकामिल २५ वाला २६ कान २७ गरदन २८ सुमरिनी २६ चीतेकीखाल ३० खड़ाऊँ ३१ सूरत ३२ लाल ३३॥