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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 64

पद्मावत । ६३ दो० जाकहँ सगुनहोहिं अस, औगवनै जेहिआस । अष्टोमहासिद्धि पंथैहि, जस कबि कहा ब्यास ॥ भयो पयानै चला तब राजा । शंखनादै योगिनकर बाजा ॥ कहिन आज कुछथोर पयानां । काल्ह पयानैं दूर है जाना ॥ वह मिलानै जो पहुँचे कोई । तब हम कहब पुरुष भल सोई ॥ है आगे परवतकी बाँटैं । विषमै पहाड़ अगमै सठघाटैं ॥ विचविच कोह नदी औ नारा । ठाँवहिं ठांव बैठि बटपारौं ॥ हनुमंतै केर सुनत पुनि हांका । वहिको पार होयको थाका ॥ असमन जानि सँभारहु आगू । अगर्वा केर होहु पछलागू ॥ दो० करहिं पयानैं भोरउठि, नितहिं कोसदश जाहिं । पंथी पंथों जो चलहिं, ते कित रहैं औठाहिं ॥ करहु दृष्टि थिरै होय बटाऊँ । आगू देखि धरहु भुइँ पांऊ ॥ योगिओवैंट भुइँ परी भुलाय । कीमरि पंथै चले न जाय ॥ पांयन पहिरलेहु सब पाँवरी । कांटे न चुभै न गड़ै अँकरोरी ॥ परी आय अववनखंडै माहां । डंडौ कारन बीच निबाहां ॥ सघनै ढांखवन चहुँदिशँ फूला । बहुतुखमिलै वहांकर भूला ॥ झाँखरजहांसु छांड़हु पन्थौ । हिलगम कोयनफारहु कन्थौ ॥ दहिने विदैरै चंदेरीं । वायैं । वहिकहँ होब बाँटै दुइठाँयें ॥ दो० एक वाँट गई सिंहलैं, दूसर लंक समीपैं । जाना १ कामिल २ राह ३-१०-२०-२५-३१-३५-३७ कूच ४ शंखकी आवाज़ ५ कूच तथा मौतका दिन ६ कूच दूर तथा क़यामतका दिन ७ मिलना ८ जवाँमर्द ९ टेढ़ा ११ जहां कोई न पहुँचसके १२ जगह १३-३६ राहलूटनेवाले १४ वन्दर १५ गुरू १६ कूच १७ हररोज़ १८ राहचलनेवाले १६ निगाह २१ कायम २२ मुसाफ़िर २३ राह बतलानेवाला २४ खड़ाऊँ २६ जंगल २७ नाम जगह २८ गुंजान २६ चारोंतरफ़ ३० गुदड़ी ३२ नाम मुल्क ३३-३४ जगह ३६ नाममुल्क तथा स्वर्ग ३८ नाम मुल्क तथा नरक ३६ बराबर ४० ॥