भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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६४ पद्मावत । : है आगे पंथ दो बनहिं, गवनबै केहिदीप । ततखन बोला सुआ सरेखौ । अगवों सोई पंथ जेहिं देखा ॥ सो का उड़ै न जेहि तन पांखू । लैसोपलाशँहि बोलै शाखू ॥ जस अंधा आँधीकर संगी । पंथ न पाव होय सहलँगी ॥ सुनिमति काजचहसि जो साजा । बीर्जा नगर विजौगिरराजा ॥ पूंछा जहां कुण्ड औ गोलां । तजि वायें अंध्यारे खटोला ॥ दखिन दाहिने रहै तिलंगौ । उत्तरमांझ होय कहँोकंटंगा ॥ मांझ रतननपुर सौंह दुआरा । झारखण्ड वे वांयें पहारा ॥ दो० आगे बाउँ उड़ीसों, वायें देहिसु वौंट । दहिनाव्रत लायके, उतर समुद्रकी घाट ॥ होत पयान जाय दिनकेरों । मिरगार्ने मंहिं कीन्ह बसेरा ॥ कुश सांठर भइ सूरि सपेती । करवंटे आय वनी सुँइसेती ॥ क्यामिली जसभूमि गलीजा । चलिदसकोस ओसतनभीजा ॥ ठांव ठांव सब सोवहिं चेला । राजों जागै आप अकेला ॥ जेहिके हिये प्रेम रंग जामा । का तेहि नींद भूखविशरामाँ ॥ बन अँध्यार र्यानि अँधियारी । भादों बरन भयो अतिभारी ॥ किंगरी गहे हाथ बैरागी । पंचतन्त धुनिओही लागी ॥ दो० नयनं लाग तेहि मारेंगे, पद्मावत जेहि दीप । जैसे स्वाति बूँदकह, बन चातकै जलसीप ॥ राह १-६-१६-३१ जाना २ तोता होशियार ३ राहबतानेवाला ४ नाम दरख्त ५ भोलामारहुआ ७ सलाह ८ नाम मुल्क ६ छोड़ना १० नाम मुक़ाम तथा योग की क्रिया ११-१२-१३ नाम मुल्क तथा मुक़ाम मतलब १४ नाम मुल्क १५ कूच १७ शामकेवक्त १८ जंगल तथा कबरिस्तान १६ तोशक और लिहाफ़ २० तकिया २१ ज़मीन २२ जगह २३ रतनसेन सुरांद परसे- श्वर २४ दिल २५ आराम २६ रात २७ नाम बाजा २८ पाँचतार २६ आँख ३० पपीहा ३२ ॥