भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । ६६ दो० दशमहँ एक जायकोइ, कर्म धर्म संत नेम । वोहिते पार होइ जो, तौहो कुशल औ खेम ॥ (१५८) बात कहत भइ देश गुहारी। केवटँहि चालैँ समुद्रमहँ मारी ॥ हस्ती लाय सिष्टं सब ढीला । दौड़आय इक चालैंहि लीला ॥ केवर्ट लागिलागि सब बली। फिरैन चालैँ जाय बहिचली ॥ वोहितँ सहसैं जाहिं चहुँओरा । होयकलोलैं जाहिं तरि बोरा॥ सुनिके आप चढ़ौँसें राजा । औ सबलोग देशमिलबाजाँ ॥ भालवांस खांड़े बहु परहीं। जान पखालै बाजके चढ़हीं ॥ चारालोल जो माछर बाभी । कहां जाय जो जाकर खंभी ॥ दो० माछरकर भूखहि हृदयँ, तेहि साधै विषं वान । सबहिँ पहुँचकै मारा, चालैहि तजौ परान ॥ (१५९) जस धौलागिरि २४ परवत होई । तेही भांति उतरान्यो सोई ॥ सबै देश मिलि तैरहिं आना। लिये कुल्हाड़ी लोग जहाना ॥ जनु परवत कहँ लागहि चांटी २५। लेगये मांस रही सब कांटी ॥ मांजर परी कोसदस वँड़ी । मांजरिकस जस श्वेतँ बरेंड़ी ॥ नयनँ सोजानिकोटकी पँवरे २८ । कितअसगहे २६ फिरेतेहिभँवरे॥ रतनसेन से संघी कहें । अस अस मच्छ समुद्र महँ अहँ ॥ राजा तुमचाहो तहिँगवनौँ । होइकेसजगै बहुरि नहिँअवना ॥ दो० तुम राजा औ गुरू, हम सेवक औ चेरै । कीन्ह चहैं सब आयसैं, अबगवैनी तहिफेर ॥ (१५०) नाव १-११ खैरियत २ नाखुदा अर्थात् मल्लाह ३-८ नाम जानवर ४-७-१०-२२ हाथी ५ ज़ंजीर ६ ज़बरदस्त ६ हज़ार १२ तैर १३ पानी के नीचे १४ फ़ौज १५ पहुँचना १६ तलवार १७ नासजानना १८ खुराक १६ पेट २० ज़हर २१ छोड़ना २३ नाम पहाड़ २४ चूंटी २५ सफ़ेद २६ आंख २७ क़िलेका दरवाज़ा २८ पकड़ना २६ जाना ३०-३५ होशियार ३१ लौटना ३२ गुलाम ३३ हुक्म ३४ ॥