पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 69, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ पद्मावत । प्रेम पंथं जो पहुँचै पारा । बहुरै न आय मिलै यहि छारौँ ॥ तेहि पावा उत्तमै कैलासू । जहां न मीचै सदा सुख वासू ॥ दो० यहि जीवनकी आशका, जैसे स्वप्न तिल आध । मुहम्मद जीतहि जो मुये, ते पूरुष सिध साध ॥ जस दिनरयँनि चलै गजं भांती । बोहितं चली समुद्रकी पांती ॥ धावहिं बोहितं मन उपराहीं । सहसैं कोस एक पलमहँ जाहीं ॥ समुद्र अपार स्वँग जनु लागा । स्वँगै नखाँलैं गिनै बैरागा ॥ ततखनै एक चालैँ दिखराये । जनु धौलाँगिरि पर्वत आये ॥ उठे हिलोर जो चालैँ निरोजे । लहर अकाशलानि भुँई बाजे ॥ राजा सितैं कुँवर सब कहैं । अस अस मच्छ समुद्रमहँ अहँ ॥ तेहिरे पंथं हम चाहत गवनौं । होहु सचेतै बहुरै न हिं अवनौ ॥ दो० गुरु हमार तुम राजा, हम चेला तुम नाथ । जहां पाउँ गुरु राखै, चेला राखै माथ ॥ केवटैँ हँसे सुनत को बंजौं । समुद्र न जानि कुवांकर मंजौं ॥ यहि तो चालैँ न लागै कोहू । का कहियो जब देखब रोहू ॥ सो अबहीं तुम देखे नाहीं । जेहि मुख ऐसे सहसँ समाहीं ॥ राजपंखैँ तेहिपर मँडराहीं । सहसँ कोस तिनकी परछाहीं ॥ तेवै मच्छ ठौर भैंहि लेहीं । शावकैं मुख चारा ले देहीं ॥ गरजे गगनैँ पंख जो खोलहिं । डोले समुद्र डहन जो डोलहिं ॥ तँहाँ न सूर्य न चांद असूझा । चढ़ै सोई जेहि अगम नैनैं बूझा ॥ राह १-२०-३४ लौटना २-२३ मिट्टी ३ वैकुण्ठ ४ मौत ५ मर्द ६ रात ७ हाथी ८ नाव ६-१० हज़ार ११-२८-३० आसमान १२-३३ ऊँचा १३ नीचा १४ यकायक १५ नाम जानवर १६-१८-२७ नाम पहाड़ १७ हिलना १६ जाना २१ होशियार २२ मल्लाह २४ बातचीत २५ मेढक २६ सीमुर्ग २६ पक- ड़ना ३१ बच्चा ३२ तथा परमेश्वरकी दूरन्देशी ३५ ॥