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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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७८ पद्मावत । चौमुख मण्डफ चँहूँ केवारा। बैठे देवता चहूँ दुवारा॥ भीतर मण्डफ चारंखम्भ लागे। जेहि वे छुवे पाप तेहि भागे॥ शंख घंट नितैं बाजहिं सोई। औ बहु होम जाप तहँ होई॥ दो० महादेव कर मण्डफ, सकलैं यात्रा आव। जस इच्छामन जेहिकी, सो तैसो फल पाव॥ खण्ड चौदहवां गवन मण्डफ खण्ड राजा रतनसेन॥ राजा बावर विरह बियोगी¹। चेला सहसें तीस सँग योगी॥ पद्मावत की दरशन आसा। दण्डवतकीन्ह मण्डफचहुँपासा॥ पूर्बद्वार होयके शिरनावा। नावतशीशँ देव पुनि आवा॥ नमो नमो नारायण देवा। कामैं योग सकौं कै सेवाँ॥ तुइँ दयालु सबके उपराँहीं। सेवाकेर आशैं तुहिनाहीं॥ नामोहिं गुनैन जीभ रसबाता। तुइँदयालु गुनैं निरगुनैं दाता॥ पुरवहु मोर दरश की आसा। हौं मारँग जो करौं श्वासा॥ दो० तेहि बिधिविनयै न जान्यो, जेहिबिधि अस्तुति तोर। कर सुदृष्टि औ कृपा, इच्छा पूजै मोर॥ कै अस्तुति जो बहुत मनावा। शब्देँ कोटिमण्डफ मँहँआवा॥ मानुष प्रेम भयो बैकुण्ठी। नाहत काहि छारँ एकमूठी॥ प्रेमहि माहिं बिरह रसरसा। प्रेमके घर मधु अमृतवसा॥ नैतैं धाय जो मरै तो काहा। संतजो करै बैठि तेहिलाहौं॥ एकबार जौं मन दै सेवा। सेवेहि फल प्रसन्नै है देवा॥ चार १ हमेशा २ सर्व ३ दुखी ४ हज़ार ५ दरवाज़ा ६ शिर ७ ख़िदमत ८ दया करनेवाला ९-१३ ऊपर १० उम्मेद ११ हुनर १२ दाना १४ नादान १५ अर्थात् उसी तरह का दम बदम ढूंढनेवाला हूं १६ तारीफ़ १७ निगाह अच्छी १८ आवाज़ १९ माटी २० शराब २१ बदराह २२ फ़ायदा २३ खुश २४॥

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