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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 78

पद्मावत। ७७ जेहि परबतपर दरशन लीन्हा। शिरसों चढ़ों पायँका कीन्हा॥ मोहिं सो भावै ऊँचे ठाऊँ। ऊँचे लेवों प्रीतम नाऊँ॥ पुरुषै चाहिये ऊँच हियाऊ। दिन दिन ऊँचे राखे पांऊ॥ सदा ऊँच पैसैये बारूँ। ऊँचै से कीजै ब्योहारू॥ ऊँचे चढ़ै ऊँच खंड सूझा। ऊँचे पास ऊँच मति बूझा॥ ऊँच सङ्ग सङ्गत नितै कीजे। ऊँचे लाय जीव बलि दीजे॥ दो० दिन दिन ऊँचहोय सो, जेहि ऊँचे पर जाव। ऊँच चढ़े जो खसिपड़े, ऊँच न छांड़े काव॥ नीच संग नितँ होय निचाई। जैसे हंस काग की नाई॥ नीच से कबहूँ न होय भलाई। नीचहिसों पर होय मुड़ाईँ॥ नीच न कबहूँ जिय महँ तांके। नीच नहीं कबहूँ मुख भाँखे॥ नीच न कबहूँ आवे काज़ा। नीचहि अहै न एकौ लाजा॥ नीचेका सँग कबहूँ न कीजे। नीचे पंथै पाँउ नहिं दीजे॥ नीचे नहिं कीजे ब्योहारूँ। नीच न कबहूँ दीजै भारूँ॥ नीचे केर न कीजे साथा। नीच गहे कुछ आवि न हाथा॥ दो० होय नीच नहिं कबहूँ, जेहि ऊँचै मन भाव। नीच ऊँचते हँसी, नीचे केर स्वभाव॥ हीरामने दे बचों कहानी। चली जहां पद्मावत रानी॥ राजा चला सँवारि सो लत्ताँ। परबतकहँ जो चला परबतीँ॥ का परबती चढ़ि देखे राजा। ऊँच मण्डप सोने सब साजीँ॥ अमृत फर सब लागि अपूरे। औ तहँ लागि सजीवन मूरै॥ जगह १ मर्द २ हिम्मत ३ दरवाज़ा ४ हमेशा ५-७ कुर्बान ६ गुमनामी ८ ख्याल करना ६ मुँह से बोलना १० राह ११ धोखा १२ पकड़ना १३ नाम तोता १४ क़ौल १५ धन १६ तोता १७ सामान १८ नाम बूटी १६