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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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॥ पद्मावत ॥ ७ बचनं¹ एक जो सुनायहिं सांचा। वही पुराण दुहूं जगं² बांची॥ दो० जो पुराण बिधि³ पठवा, सोई पढ़ति ग्रंथ⁴। और जो भूली आवत, सो सुन लागे पंथ⁵॥ शेरशाह देहली सुलतानू। चारहुं खंड तपी जस भानू⁷॥ ओही छाज छाति औ पाटा। सब राजैं भुइँधरा लिलाटां॥ जात शूर औ खांडे शूरों। औ बुधवन्त सबै गुण पूरा॥ शूरै³ नवाई नवैं खंड¹⁴। वृहे सातै द्वीप दुनी सब नये॥ तहँलग राज खड्गं¹⁶ करि लीन्हा। इसकंदर ज़ुलकरनयन जो कीन्हा। हाथ सुलेमानें¹⁶ केर अँगूठी। जग कहँ दानं¹ दी न भरि मूठी॥ औ अतिगरू भूमिपति¹ भारी। टेकें भूमि सब सृष्टि सँभारी॥ दो० देहि अशीश मुहम्मद, करहु युग युग राज। वादशाह तुम जगतें के, जगैं तुम्हार मुहताज॥ बरनौं शूरैं²६ भूमिपति राजा। भूमिं²⁷ न भार सहै जो साजा॥ हय मय सयनं चलय जगै पूरी। परबंत टूटि उड़हिं होय धूरी॥ परी रेणुं³² होय रवि³³ हीं ग्रासा। मानुष पेखलेहिं फिरि बासा॥ भुइँ उड़ अन्तरिक्षै³⁶ गई सुतमंडाँ। ऊपर होय छावा महिमंडाँ॥ डोलै गगनें इन्दर डर काँपा। बासुकि जाय पतालहि चाँपा॥ मेरुँ धसमसे समुंद्र सुखाई। बन खंड टूटि खेहँ मिलि जाई॥ अगलहिं कहँ पानी गहि बांटा। पिछलेहिं कहँ नहिं काँदू आँटा॥ 'बात १ दुनिया २ पढ़ना ३ ईश्वर ४ किताब ५ राह ६ तरफ ७ सूर्य्य ८ तख्त ६ माथा १० पठान ११ तलवार बहादुर १२ बहादुर १३ सारी दुनिया १४ मुल्क १५ तलवार १६ नाम बादशाह १७-१८ दुनिया १६ खैरात २० बादशाह २१ जमीन २२ दुनिया २३-२४-२५ तारीफ़ करना २६ बहादुर २७ बादशाह २८ जमीन २६ घोड़े से भरी हुई फ़ौज ३० दुनिया ३१ पहाड़ ३२ धूरि ३३ सूर्य्य ३४ बीच ३५ आसमान ३६-३८ ज़मीन ३७ नाम राजा साँपों का ३६ पहाड़ ४० जंगल ४१ राख ४२ चहला ४३ ॥