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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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८ | पद्मावत। दो० जोगढ़ै¹ नयनहिं काहू, चलतहोय सब चूर। जो वह चढ़ै भूमिपति², शेरशाह जगशूरै³ ॥ अद्लैं⁴ कहौं प्रथम⁵ जसहोय। चाँटाँ⁶ चलत न दुखवैकोय ॥ नौशेखाँ जो आदिल⁸ कहा। शाहअदलैं⁹ सैरे¹० सौहिनरहा ॥ अद्लैं जोकीन्ह उमरै¹³ कीनाई। भई यहां संगरी दुनियाई ॥ परी नाँथै कोई छुवै न पारा। मार्गै¹⁴ मानुषसे उजियारा ॥ गऊ सिंहैं¹⁷ रेंगहिं एक बाटाँ। दोनों पानिपियैं एक घाटा ॥ नीरैक्षीर¹⁸ छानै दरबारा। दूध पानि सब करै निराराँ¹⁹ ॥ धर्म न्याय चलै सँतं²⁰ सांझा। दूवर वैरी एक समैं²¹ राखा ॥ दो० संबै पृथिवी अशीशै, जोरि जोरिकै हाथ। गङ्ग यमुन जौलहि जल, तौलहिं अमरनाथै²² ॥ पुनि रुपैवंत²³ बखौनों²⁴ काहा। जानवन्तजगतंसवेमुखजाहा॥ शेशि²६ चौदहजोदई²७ संवारा। तबहूँ जाहि रूप उजियारा ॥ पापंजाय जो दरशन दीशा। जगँ जुहारके देत अशीशा ॥ जैसो भानुं²⁸ जगै ऊपर तपा। सबै रूप वह आगे छिपा ॥ असभा शूरै पुरुषै³² निरमरौं³³। शूरै जाहि दशआकरै³⁴ करा ॥ सौहिं दृष्टि की हेरै³⁷ न जाई। जेहिदेखा सो रहा शिरनाई ॥ रुपसवाई दिन दिन चढ़ा। बिधि³⁸ सुरूप जगँ³⁹ ऊपरगढा ॥ दो० रूपवन्ते⁴⁰ मनमाथे चन्द्रघाट वह बाढ़ि। क़िला १ टूटना २ वादशाह ३ दुनिया का सूर्य्य ४ न्याय ५ पहिले ६ चाँवटी ७ नाम बादशाह ८ न्याय करनेवाला ६ न्याय १०-१२ बराबर ११ नाम खलीफ़ा १३ नाथना १४ राह १५-१७ शेर १६ दूधपानी १८ अलग १६ सच्चा २० ज़बरदस्त २१ बराबर २२ हमेशाज़िंदा २३ खूबसूरत २४ बयान करना २५ दुनिया २६-२६ चांद २७ ईश्वर २८ सूर्य्य ३० संसार ३१ बहा- दुर ३२-३५ मर्द ३३ पाकसाफ़ ३४ दशगुना ३६ सुधीनिगाह ३७ देखना ३८ ईश्वर ३६ दुनिया ४० खूबसूरत ४१ ॥