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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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८० पद्मावत। १ कहां सो भँवर कमल रसलेवा। आय परीहोय घरन परेवो॥ दो० सो धनी बिरहपतंग भइ, जरा चहैं तेहि दीप। कंतै न आवभृंग होय, को चन्दन तन लीप॥ परी बिरह बन जानौ घेरी। अगमँ असूझ जहांलग हेरी४॥ चतुरदिशा चितवे जनु भूले। सो बन कौन जो मालतिफूले॥ कमल भँवर ओही वन पावे। कोमिलाय तनतपन बुझावे॥ अंग अंग अस कमल शरीरा। हियँ भा पियर प्रेम की पीरा॥ चहीदरशराँवि कीन्हविकाशू। भँवरदृष्टि मनलागचकासू॥ पूँछे धायँ बौरि कहु वाता। तुइँजस कमल करी रंगराताँ॥ केसरबरनें रंग भा तोरा। मानहुँ मनहि भयो कुछ फोरा॥ दो० पवन न पावै संचरी, भँवर तेहों नहिं बैठि। भूलकुरंगिनें कसभई, जानु सिंहँ तुइ डीठि॥ धाय सिंह धेरै खात्यों भारी। कीतसें रहत अहे जसवारी॥ जो बनसुनो किं नवेँल बसन्ता। तेहिबन परा हस्तमैमन्ताँ॥ अब जोबन बौरी को राखा। कुंजरै विरहबिखा सें शाखा॥ मैं जानो जतिन रस भोगू। जोवनकठिनँ सतापवियोगूँ॥ जोबन गरुश्रा पेल पहारू। सहि न जाय जोवनकर भारू॥ जोबन अस मँनमत्तै न कोई। नवे हस्तै जो अंकुश होई॥ जोबन भरि भादों जस गङ्गा। लहरें देइ समाय न अङ्गा॥ दो० पखों अथाह धायहौं, जोवन उदधिगँभीरँ। कबूतर १ पद्मावत २ खाविन्द ३ मुश्किल ४-२२ देखना ५ दिल ६ सूर्य ७ खिलना ८ निगाह ६ लौंडी १० लड़की ११-२० लाल १२ पीला १३ हिरनी १४ शेर १५ शेर ने क्या मारा है १६ अर्थात् लड़काँई में कैसी थी १७ नया १८ हाथी मस्त १६-२१-२६ दुख २३ बोझ २४ मस्त २५ समुद्र गहरा २७॥