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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 84

॥ पद्मावत ॥ ८३ रही रोय जब पद्मिनि रानी । हँसि पूँछहिं सब सखी सयानी ॥ मिले रहस भा चाहे दूना । कित रोई जो मिले बिछोना ॥ तेहिकें उतरै पद्मावत कहा । बिछुरन दुख जो हियैं भर रहा ॥ मिलत हिये आयै सुख भरा । वह दुख नयननीर होय ढुरा ॥ दो० बिछुरंता जब भेटे, सो जाने जेहि नेहँ । सुख सुहेला उगवै, दुःखझरै जिमि मेहँ ॥ खण्ड पन्द्रहवां मुलाकात खण्ड पद्मावत औ हीरामन ॥ पुनि रानी हँसि कुशलै पूँछा । कितं गे वनहिकै पिंजर ढूँछा ॥ रानी तुम युगयुग सुखपाटूँ । छाजै न पंखी पिंजर ठाटू ॥ जो भा पंख कहां थिरें रहना । चाहे उड़ा पंख जो डहनों ॥ पिंजर महँ जो परेवां घेरा । आय मँजोरै कीन्ह तहँ फेरा ॥ दिवसकें आय हाथ पै मेला । तेहि डर बनोबासकहँ खेलौं ॥ तहां जाय ब्याध नर सांघा । छूट न जाय मीच कर बांधा ॥ वें घर बेचा ब्राह्मण हाथा । जम्बूद्वीप गयौं तेहि साथा ॥ दो० तहां चित्र चित्तौरगढ़, चित्रसेन कर राज । टीकों दीन्ह पुत्रकहँ, आप लीन्ह शिवसाँजै ॥ बैठि जो राज पितौँ कर ठाँऊँ । राजा रतनसेन तेहि नाऊँ ॥ का वरँणों धन देश दुवारा । जहँ असनगउपजौं उजियारा ॥ धन माता औ पिता बखाना । जेहिके वंश अंशै असआना ॥ खुश १ जबाब २ दिल ३-४ आंसू ५ मुहब्बत ६ जिस तरह ७ बादल ८ खैरियत ६ कहां १० तख्त ११ सोहना १२ जानवर परिन्द १३-१६ कायम १४ बाजू १५ बिल्ली १७ एक दिन १८ जाना १६ तसवीर २० राजतिलक २१ मरना २२ बाप २३ जगह २४ तारीफ़ २५ पैदाहोना २६ अक़बालवाला २७ ॥