पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८२ पद्मावत । कहेसि प्रेम उपजा जो बारी । बांधि सत्तमन डोलन भारी ॥ जेहिजिय मनहिं सत्त होय भारू । परे पहार नहिं बांके बारू ॥ सती जो जरी प्रेम पै लागी । जोसतहिये तो शीतल आगी ॥ जोबन चांद जो चौदसें करा । विरहकीचिंगगी सो पुनिजरा ॥ पवन बन्धु सो योगी यती । कामबन्ध सो कामिनें सती ॥ आव बसन्त फूल फुलवारी । देव बारैं सब जोहहिं बारी ॥ दो० तुम पुनि जाहु बसन्त लै, पूज मनावहु देव । जीव पाय जग जन्म है, पिय पाई कै सेवँ ॥ जबलगअवैधिआय नियराई । दिनयुगयुगविरहिनकहँजाई ॥ नींद भूखनिश् दिनगइदोऊ । हिये मांझ जस कलपै कोऊ ॥ रोमरोम जनु लागहिं चांटे । सूतें सूत जनु वेधे कांटे ॥ दग्धै कराह जरे जस घीव । बेगें न आव मलयगिरि पीव ॥ कौन देवकहँ जाय परोसों । जेहि सुमेरु हियें लाय गिरासों ॥ गूंजे जो फलसासहि परगंटे । अवहोय सुअै चहहिं हम घंटे ॥ भइ संयोगें जुरा अस मरना । भूखहि गई भोगका करना ॥ दो० यौवन चञ्चल ढीठ है, करे न कीजै काज । धन कुलवन्त जो कुलधरै, की जीवन मनलाज ॥ तेहिं वियोगें हीरामैनँ आवा । पद्मावत जानहु जिव पांवा ॥ कंठ लगाय सुआँ सों रोई । अधिकमोहें जोमिले विछोई ॥ आगउठी दुख हिये गंभीरेँ । नयनेंहिं आय चुवा होय नीरूँ ॥ पैदा होना १ लड़की २-६ दिल ३-२०-३१ ठंडा ४ चांद चौदहीं के बराबर ५ हवा ६ औरत ७ दरवाज़ा ८ ख़िदमत १० हद ११ रात १२ बीज १३ सूराख़ १४ गर्म १५ जल्द १६ चन्दन १७ पूजन १८ नाम पहाड़ १६ छिपा २१ ज़ाहिर २२ हर रगमें भरा है कि दम वदम घटती है २३ मुलाक़ात २४ कामवाला २५ दुःख २६ नाम तोता २७-२८ बहुत पियारा २६ बिछुड़ाहुआ ३० भारी ३२ आंख ३३ पानी ३४ ॥