भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 86

पद्मावत । ८५ नगकरमर्म सो जड़िया जाना। जड़ै जो असनगदेखें बखानाँ॥ को अस हाथ सिंहें मुख घालै। को यह बात पिताँ सों चालै ॥ दो० स्वर्ग इन्द्र डर कांपै, बासुँकि डरै पतार। कहँ ऐसो वर पृथ्वी, मोहिं योग संसार ॥ तुइँरानी शशि कञ्चन कलाँ। वह नगरतन सूरै निरमलौँ ॥ विरह बिजागे बीजगा कोई। आग जो छुवै जाय जर सोई॥ आगबुझायधोय जल गाढ़े। वह न बुझाय आग अतिबाढ़े॥ बिरहकी आग सूरै जरकपा। रातहि दिवसैं जरै औ तपा॥ खनहि स्वर्ग खनजाय पतारा। थिरै न रहै यहि आग अपारा॥ धनि सो जीव दगधै इभि सहा। ऐसो जरै दूसर नहिं कहा ॥ सुलगसुलग भीतर होय श्यामाँ। प्रगटै होय नहिं काढ़ै नामा॥ दो० काह कहौं ओही सों, जो दुख कीन्ह निमेट। तेहिदिन आग करों यह बाहर, जेहिदिन होय सुभेट॥ सुना जो असधनै जारा कयौँ। तनभा सांचै नयनै भामयाँ ॥ देखों जाय जरै जसभानू। कञ्चनै जरै अधिकै होये बानूँ ॥ अब जो जरै सुप्रेम वियोगी। हत्यामोहिंजेहिकारणैयोगी॥ हीरामन सो कही रस बाता। सुनिके रतनै पदारथ राता॥ योगी योग सँभारहिं छाला। देहों झुकै देहों जैमालौँ ॥ आव बसन्त कुशल सो पाऊं। पूजा मिसँ मण्डफकहँ आऊँ॥ भेद १ देखना २ तारीफ ३ शेर ४ बाप ५ आसमान ६ नाम राजा सांपों का ७ खाविन्द ८ ज़मीन ६ चांद १० सूर्य ११-१४-२७ पाकसाफ़ १२ आग १३ दिन १४ कभी १६ क़ायम १७ जलन १८ इसतरह १६ सियाह २० ज़ाहिर २१ औरत तथा पद्मावत २२ बदन २३ सांचा २४ आंख २५ मोम २६ सोना २८ बहुत २६ खरा ३० दुखी ३१ सबब ३२ जवाहर ३३ मुख ३४ जिसके गलेमें पड़े उसी के साथ शादी हो ३५ बहाना ३६ ॥