पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगुरु के बचन फूल हियें गाथे । देखों नयनं चढ़ाऊँ माथे ॥ दो० कमल बरण तुम बरना, मैं माना पुनि सोय । चांद सूर्य्य कहँ चाही, जोरी सूर्य्य वह होय ॥ हीरामनेँ जो कही रस बाता । पाँय पान भयो मुख राताँ ॥ चला सुआ तब रानी कहा । भा जो पराउ जो कैसे रहा ॥ जो नित्तं चलै सँवारहि पाखा । आज जो रहा काल्हकोँ राखा ॥ नाजनो आजकहां दिनउवा । आयहिमिलै चलहिमिलसुवाँ ॥ मिलके बिछुर मरनकी आनीं । कत आयहु जो चलहि निदानीं अनरौनी जो रहतोँ राँधौं । कैसे रहौं बचनें करे बांधा ॥ ताकर दृष्टि ऐसो तुम्ह सेवा । जैसे कुञ्ज मन् सेज परेवा ॥ दो० बसै मीने जल धरँती, अम्बौ वर्ष प्रकास । जो प्रीति पै दोउ महँ, अन्तैं होहिं एकपास ॥ आवा सुआ बैठिजहँ योगी । मारगं नयनें वियोगें वियोगी ॥ आय प्रेमरस कहा संदेशू । गोरख मिला मिला उपदेशू ॥ तुमकहँ गुरु मयाँ बहुकीन्हा । कीन्ह अदेश आवकहँ दीन्हा ॥ शब्द्दी एक होय कहा अकेला । गुरु जसभृङ्ग पतँग जस चेला ॥ भृङ्गी ओही पंखेँ पै लेइ । एकहि बार चहै जिव देइ ॥ ताकहँ गुरु मयाँ भलकीन्हा । नवअवतारें ज्ञानें बहुदीन्हा ॥ होय अमर अस मरके जिया । भँवरकमल मिलके मधुपिया ॥ दो० आवै ऋतुबसन्त जब, तब मधुकैरै तवबास । दिल १ आंख २-२१ रंग ३ नाम तोता ४ लाल ५ हररोज़ ६ तोता ७ बराबर ८ कहां ६ जल्द १० ऐ रानी ११ नज़दीक १२ क़ौल १३ निगाह १४ नाम जानवर परिन्द १५ मछली १६ ज़मीन १७ पानी १८ आखिर १६ राह २० जुदाई २२ दुखी २३ नाम फ़क़ीर २४ नसीहत २५ मेहरबानी २६-३३ सलाम २७ बात २८ नाम कीड़ा २६-३०-३१ पांखी ३२ नया जन्म ३४ अक़्ल ३५ हमेशा ज़िन्दा ३६ भँवरा ३७ ॥