पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 90, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंफाग खेलि पुनि दाहवैं होली । सेततखेंहं उड़ावब झोली ॥ आज छांइ पुनि दिवसैं न दूजा । खेल बसन्त लेहु कै पूजा ॥ भा आयसु पद्मावत केरा । फेरन आय करब हम फेरा ॥ तसहम कहँ होयहै रखवारी । पुनि हम कहां कहां यह बारी ॥ दो० पुनि रै चलब घर आपने, पूज विश्वेश्वर देव । जेहिको होय खेलना, आज खेल हँस लेव ॥ काहूँ गही अम्ब की डारा। कोई बिरह जम्बू अति छारा ॥ कोइ नारंग कोइझारै चिरौंजी। कोई कटहरे बड़हरे कोइ न्यौजी ॥ कोइ दाड़िमैं कोइ दाखें खैरीं। कोइ सदाफैर तुरंजे जँभीरी ॥ कोइ जैफैर कोइ लोंग सुपारी। कोइ कमरुख कोइ कोंबों छारी ॥ कोइ बिजोरैं कोइ नरियारैंघूरी। कोइइमली कोइ महुवाखजूरी ॥ कोइ हरफा कोइ चोर करौंदा । कोइ अनार कोइ बेरिकिसौदा ॥ काहू गही केला की घौरी । काहू हाथ पड़ी निमकौरी ॥ दो० काहू पाई नेरे, काहू कहँ गये दूर। काहू खेल भयो विषै, काहू अमृत मूर ॥ पुनि बीनहिं सब फूल सहेली । जो जेहि आस पास सब बेली ॥ कोइ क्यौड़ा कोइ चम्पनेवारी । कोई केतकि मालति फुलवारी ॥ कोई सतवैरंग गोंद औ करना। कोई चमेलि नागैसर बरना ॥ कोइ सुगुलावै सुदर्शनै कूजों । कोइ सोन जैद भलपूजा ॥ कोइ सोवोलसै पुहुप बैंकोरी । कोई रूपमँजरी औ गोरी ॥ कोइ शृंगार हार तेहि पाहां । कोई सेवँती कदम्ब की छाहां ॥ १ जलाना २ राख धूर २ दिन ३ हुक्म ४ बागीचा ५ नाम देवता ६ लेना ७ आंब ८ जामुन ६ नाम मेवा फ़सली १०-११-१२-१३-१४-१६ अनार १५ अंगूर १६ खिरनी १७ नाम मेवा १८-२०-२१-२२ टुकड़ा २३ ज़हर २४ नाम फूल २५-२६-२७-२८-२६-३०-३१-३२-३३-३४-३५-३६-३७-३८॥