पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 91, कुल 318 में से
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६० . पद्मावत। कोइ चन्दन फूलहिं जनु फूली। कोइ अजाने बिरवातर भूली॥ दो० कोइ फूल पाव कोइ पाती, जेहिक हाथ जेहि भांट। कोइ हार चीरें उरझानी, जहां छुवे तहँ कांटे॥ फरफूलन सब डार भिराई। कुण्ड बांध के पंचम गाई॥ बाजत डोलैं दंद औ भेरें४। मन्दिर तूरें झांझ चहुँ फेरें॥ सींगी शंखे डफसंगम बाजे। बंसकार महुवरें सुरसाजे॥ और कहा जित बाजन भले। भांति भांति सब बाजत चले॥ रथहिं चढ़ी सब रूप सुहाई। लिये वसन्त मड़मँडफ सिधाई॥ नवलें बसन्त नवल वै बौरी। सेंदुर बूका करें धमारी॥ खनेहिं चलहिं खन चांचर होई। नाच छूट भूला सब कोई॥ दो० सेंदुरखेहें उठी तस, गगनैं भयो तस राते। राति सकलें महिं१८ धर्ती, राति बृक्षवन पांत॥ यहिविधि खेलत सिंहल रानी। महादेव मठ जाय तुलानी॥ सकलें देवता देखन लागे। दृष्टि२१ पाप सब उनके भागे॥ ये कैलास सुनें अप्सरी। कहांते आय टूटि भुइँ परी कोई कहै पद्मिनी आई। कोइ कह शेशि औ नखत तराई॥ कोई कहै फूल फुलवारी। फूली सबै देखके वारी२४ एक स्वरूप औ सेंदुर सारी। जानहु दिया सकलें में हि वारी सुरछ परै जोई मुख जोहे। मानहु मिरगं दवारहिं मोहे दो० कोई परा भँवर होय, वास लीन्हे जनु चांपे२७। कोइ पतङ्ग भा दीपक, कोइ अधजर तन कांप॥ नाम फूल १ कपड़ा २ नाम बाजा ३-४-५-६-७-८-६-१० नया ११ लड़की १२-२४ कभी १३ धूर १४ आसमान १५ लाल १६ सब १७-२० ज़मीन १८-२५ पहुँचना १६ निगाह २१ चांद २२ छोटे नखत २३ हिरन २६ चम्पा २७ पांखी २८॥