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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत गई देव दुआरा । भीतर मँडफ कीन पैसारा ॥ देवै संशय भा जिय केरा । भागों केहिदिशि मण्डफ घेरा ॥ एक जुहारे कीन्ह औ दूजा । तिसरे आय बढ़ायसि पूजा ॥ फर फूलन सब मँडफ भरावा । चन्दन अगर देव अन्हवावा ॥ भरि सेंदुर आगें भइ खरी । परसि देव पुनि पांयन परी ॥ और सहेली सबे बिवाहीँ । मोकहँ देवकि तुहुँवरें नाहीं ॥ हौँ निरगुन जेँ कीन्ह न सेवा । गुनें निरगुनें दाताँ तुम देवा ॥ दो० वरसंयोगों मोहिं मिलवहु, कलशं जातहौँ मान । जा दिन इच्छा पूजै, बेग चढ़ातुं आन ॥ इच्छे इच्छ बिनती जस जानी । पुनि करे जोरिठाढ़ भइ रानी ॥ उतरें को देय देव सोगयो । शब्दे कोट मण्डफ महँ भयो ॥ काटिप्यारों जैसे परेवा । सोगयो ईश उतरें को देवा ॥ भये जीव बिन नाउत ओझा । विषभइ पूरि कालभयें गोझा ॥ जो देखे जनु विषहेरें डसा । देख चरित पद्मावत हँसा ॥ भल हम आय मनावा देवा । गाजन सोय को मानै सेवा ॥ को इच्छा पुरवै दुख खोवा । जहिंमन आय सो तनतन सोवा ॥ दो० चहुँदिशि सखी उठावहिं, शीशें बिकल नहिं डोल । धर कोइ जीवन जानो, मखरे बकत कुबोल । ततखने आय सखी तहँसानी । कौतुक एक न देखहु रानी ॥ पूर्व दौरै मठ योगी छाये । नाजनो कौन देश ते आये ॥ जनु उन योग तन्त अब खेला । सिद्धे होय निसरे सब चेला ॥ १ सलाम १ जाविन्द २ बेहुनर ३-५ हुनर ४ देनेवाला ६ खाविन्द लायक ७ आरजू ८-१० जल्द ६ हाथ ११ जवाब १२-१६ आवाज १३ छोड़ देना १४ देवता १५ सांप १७ ख़िदमत १८ चारों तरफ १६ शिर २० यकायक २१ दर- वाज़ा २२ कामिल २३ ॥