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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 96

पद्मावत । ६५ हाथ मींज शिर धुन रोवे, जो निश्चिन्त अस सोय ॥ जस बिछोहे जलमीन दुहेलाँ । जल हति काढ़ अगिनिमहँ मेला ॥ चन्दन अंकैं दाग होय परे । बुझहिंन ते आखरैं परजरे ॥ जेहि शिर आगैं होय होय लागी । सब तन दाग सिंहँबन दागी ॥ जरैमृग बनखण्ड वह ज्वाला । औतीजरहि बैठि तेहि छाला ॥ कितते अंक लिखे जहँ सोहा । मग अंकित तेहि करत बिछोहा ॥ जैसे दुखित कंसों कोतला । माँधौ नलहि कामकन्दला ॥ भयो अंक नल जैसे दमावत । नयनों मूंद छिपी पद्मावत ॥ दो० आय बसन्ता छिपरहा, होय फूलन की भेश । केहिविधिपाऊं भँवरहोय, कवन सो करों उपदेश ॥ रोवत रतन माल जनु चूरों । जहँ होय ठाढ़ होय तहँ कूरों ॥ कहां वसन्त सो कोकिल वैना । कहां कुसुमअंजलि बेधी नयना ॥ कहां सुमूरति परी जो डीठी । काढ़िलिहेसिजिव हँदये पैठी ॥ कहँसो दरश परशं जेहिलहा । जोसो वसन्तकरी लहि कहा ॥ पात बिछोह रुख जो फूला । सो महुवा रोवै अस भूला ॥ टपकहिं महुव आंसु तस परहीं । होयमहुवा बसन्तज्यों झरहीं ॥ मोर वसन्त सो पद्मिनि नारी । जेहिविने भयो बसन्त उजारी ॥ दो० पावा नवलेँ बसन्तपुनि, बहु आरतें बहुचोप । ऐसो न जानाअन्तैं होय, पातझरहिं होय कोप ॥ जुदाई १ मछली २ भारी ३ आग ४ हर्फ़ ५-६ शेर ७ हिरन ८ शायद मुलाक़ात न हो ९ राजा कंस रानी कोतलाके लिये १० माधौनल रानी कामकन्दला के लिये ११ राजा नल रानी दमयन्ती के लिये दुःखी १२ आंख १३ तदबीर १४ टूटना १५ आग़ाज़ १६ भँवर १७ नज़र १८ दिल १६ दीदार या क़दमबोसी २० जिसका उलटा कांटा होता है २१ नया २२ दुःख २३ आख़िर २४ ॥