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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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६८ पद्मावत । योगी आय बियोगी¹ कोई। तुम्हरे मँडफ आग तेहि बोई॥ जरी लँगूर सुरंती² उहां। निकस जो भाग भये करमुहां॥ तेहिं बज्राङ्ग जरेहों लागा। बजरङ्गी जरउठा तो भागा॥ दो० रावण लङ्का मैं दँही, वै मोहिं डाँढ़ी आय। गगन पहाड़ होत है रावट, को राखे गँहि पांय॥ खण्ड अठारहवां पार्वतीमहेशखण्ड॥ ततखन पहुँचे आय महेशू। वाहन बैल कुष्ठिकर भेशू॥ काँथरे कर्या हड़ावरैं बांधे। मुण्डमाल औ जनेऊ कांधे॥ शेषनागै सोहै करकँठेमाला। तन विभूति हस्ती कर छाला॥ पहुँची रुद्र कमलकी कंठा। शशि⁴ माथे औ शिर पर जटा॥ चँवरघंटे⁵ औ डमरू हाथा। गौरा पार्वती धनि साथा॥ औ हनुमन्त वीर सँग आवा। धरे भेष जनु बन्दर छावा॥ औ तेहि कहिन न लावहु आगी। ताकर शर्म्म जरहि जेहि लागी॥ दो० की तप करे न पारहि, की रि नसायें हि योग। जियत जीव कस काढ़ोसि, कहो सो मोसों वियोग⁶॥ कहेसि को मोहिं बात हि विहँ भावा। हत्या केर न तोहि डिरावा॥ जरे देहु दुख जरों अपारा। निसितिरैं परों जाय यकवारा॥ जस भरथरी लाग पिंगलौँ। मोकहँ पद्मावत सिंहला॥ मैं पुनि तजौँ राज औ भोगू। मुनि सुनाउँ कीन्हों तपयोगू॥ यहिं मठ सेयों २४ आय निराशा। की सु पूज मन पूजन आशा॥

  • दुखी १ लाल २ पत्थर सा चदन ३ जलाना ४-५ राख ६ पकड़ना ७ गुदड़ी ८ चदन ६ हांडों की माल १० सांप ११ गरदन १२ हाथी १३ चांद १४ घण्टी १५ क़सम १६ निबाहना १७ बरबाद १८ दुःख १६ रिहाई २० नामयोगी २१ नामरानी २२ छोड़ना २३ ख़िदमत २४॥