पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
पृष्ठ 108, कुल 726 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 108
९० पञ्चदशी २–९) ब्रह्मविदाप्नोति परम् (तै० २–१) ये श्रुतियां भी इसी अर्थ को कह रही हैं। 'न जायते म्रियते वा विपश्चित्' (कां० १– २–१८) यह श्रुति कह रही है कि ब्रह्म का जन्म नहीं होता। यही कारण है कि विद्वान् पुरुष भी अपने आत्मा को ब्रह्मरूप समझ लेने से फिर कभी जन्मता नहीं। यही बात 'न स पुनरा- वर्तते' (छा० ८–१५–१) इस श्रुति ने भी कही है। इति श्री मद्विद्यारण्यमुनिविरचितं पंचकोशविवेकप्रकरणं समाप्तम्।