भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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ओम् पञ्चदशी तत्त्वविवेकप्रकरणम् नमः श्रीशंकरानन्दगुरुपादाम्बुजन्मने । सविलासमहामोहग्राहग्रासैककर्मणे ॥ १ ॥ विलास [अर्थात् अपने कार्य] सहित जो महामोह [किंवा मूलाज्ञान] रूपी महादुःखदायी ग्राह है, उस को ग्रस लेना ही जिस चरण-कमल का एक मुख्य काम है, श्री शंकरानन्द नाम के गुरुदेव के उस चरण-कमल को हमारा प्रणाम हो— अर्थात् हम अपने आप को गुरुदेव के चरणों में अभेद भाव से अर्पण किये देते हैं । तत्पादाम्बुरुहद्वन्द्वसेवनिर्मलचेतसाम् । सुखबोधाय तत्वस्य विवेकोऽयं विधीयते ॥२॥ ऐसे गुरु के चरण-कमलों की सेवा से जिनका चित्त निर्मल [रागादि शून्य] हो चुका हो, उनको सुखबोध [सरलता से तत्व- ज्ञान] कराने के लिए, अब तत्व [अनारोपित किंवा सत्यस्वरूप] का विवेचन किया जाता है । [पंचकोश नाम के इस आरोपित जगत् में से अब उस अनारोपितस्वरूप अखण्ड सच्चिदानन्द वस्तु को पृथक् करके दिखाया जाता है] ।