भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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३२६ पञ्चदशी कर, इस कर्म और भोग के दुःखदायी अनन्त चक्र में से उन का भी उद्धार करले] । अविद्वदनुसारेण वृत्ति र्बुद्धस्य युज्यते । स्तनन्धयानुसारेण वर्तते तत्पिता यतः ॥२८७॥ ज्ञानी लोगों का बर्ताव तो अज्ञानियों के अनुसार ही होना चाहिये। देखते हैं कि छोटे-छोटे बच्चों के माता पिता उन्हीं के अनुकूल बर्ताव किया करते हैं । अधिक्षिप्तस्ताडितो वा बालेन स्वपिता तदा । न क्लिश्नाति न कुप्येत बालं प्रत्युत लालयेत् ॥२८८॥ देखा जाता है कि जब बच्चा पिता को भला बुरा कहता या मार बैठता है तब भी उसके पिता को क्रोध कुछ भी नहीं होता। प्रत्युत वह इसके बदले में भी उसे प्यार ही किया करता है । निन्दितः स्तूयमानो वा विद्वानज्ञैर्न निन्दति । न स्तौति किन्तु तेषां स्याद् यथा बोधस्तथा चरेत् ॥२८९॥ अज्ञानी लोग जब विद्वान् पुरुष की निन्दा या स्तुति करें तब इसके बदले में वह स्वयं उनकी निन्दा या स्तुति न करने लगे । किन्तु इन लोगों को जैसे भी बोध हो सके वैसा वैसा प्रयत्न करता रहे । येनायं नटनेनात्र बुध्यते कार्यमेव तत् । अज्ञप्रबोधान्नैवान्यत् कार्यमस्त्यत्र तद्विदः ॥२९०॥ विद्वान् के जिस जिस तरह के आचरण करने से, इस अज्ञानी को ज्ञान हो जाय, ज्ञानी को वही वही आचरण करते जाना चाहिये । ज्ञानी का तो इसके अतिरिक्त और कुछ भी